चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी:हाईकोर्ट सख्त, 31 जुलाई तक भर्ती विज्ञापन जारी करने के निर्देश, 20% पद खाली

चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने यूटी प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि 31 जुलाई तक 582 पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया जाए और रिक्तियों को भरने की विस्तृत योजना कोर्ट में पेश की जाए। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रशासन से तीखे सवाल पूछते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में इच्छाशक्ति की कमी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। 20% पद खाली, कोर्ट ने जताई चिंता अदालत के सामने पेश आंकड़ों के अनुसार चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में कुल 4,798 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से करीब 1,010 पद खाली पड़े हैं। यानी लगभग 20 प्रतिशत पद रिक्त हैं। कोर्ट ने पूछा कि जब शिक्षक-छात्र अनुपात और शिक्षा की गुणवत्ता सीधे प्रभावित हो रही है तो इतने वर्षों से पद क्यों नहीं भरे गए। यूटी प्रशासन ने अदालत को बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत वर्तमान छात्र-शिक्षक अनुपात औसतन 27:1 है, जो निर्धारित मानकों के भीतर है। हालांकि प्रशासन ने यह भी स्वीकार किया कि शिक्षकों की कमी वास्तविक समस्या है और इसे दूर करना जरूरी है। प्रशासन ने कहा कि पिछले वर्ष 780 शिक्षकों की भर्ती की गई थी और अब 582 नए पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन के अनुसार भर्ती प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा जा चुका है और जुलाई 2026 तक विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा। सिर्फ आश्वासन नहीं, समयसीमा चाहिए हाईकोर्ट ने प्रशासन से कहा कि केवल आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि 31 जुलाई तक भर्ती विज्ञापन जारी किया जाए और अगली सुनवाई में चरणबद्ध भर्ती योजना पेश की जाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की, कुछ भी मुश्किल नहीं है, अगर इच्छाशक्ति हो। मामले में निजी स्कूल एसोसिएशन ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि केवल स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों की बैठकें दिखाना पर्याप्त नहीं है। एसोसिएशन ने तर्क दिया कि आरटीई की धारा 8 और 34 के तहत गुणवत्ता शिक्षा और राज्य सलाहकार परिषद की नियमित बैठकें भी जरूरी हैं। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि 2014 में हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद राज्य सलाहकार परिषद की बैठकें नियमित रूप से नहीं हुईं। स्कूलवार रिपोर्ट मांगी मामले की गंभीरता देखते हुए हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्कूलवार डेटा भी तलब किया है, जिसमें प्रत्येक स्कूल में शिक्षकों की संख्या, रिक्त पद, छात्र संख्या, एसएमसी बैठकों का रिकॉर्ड और बुनियादी सुविधाओं की जानकारी शामिल होगी।

   

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