- पुराने टैक्स विवाद खत्म करने की तैयारी
चंडीगढ़, 18 मई (हि.स.)। राज्य सरकार ने छोटे करदाताओं और व्यापारियों को बड़ी राहत देते हुए जीएसटी लागू होने से पहले के लंबित कर मामलों के निपटान के लिए ‘हरियाणा एकमुश्त निपटान योजना(ओटीएस)-2026’ को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में साेमवार काे हुई मंत्रिमंडल बैठक में लिए गए इस फैसले का उद्देश्य वर्षों पुराने टैक्स विवादों को खत्म करना, मुकदमों का बोझ कम करना और बकाया कर वसूली प्रक्रिया को तेज करना है। सरकार का मानना है कि नई योजना से हजारों छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी और विभागीय विवादों में कमी आएगी। यह योजना 1 जून, 2026 से लागू होगी और 120 दिनों तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान करदाता आबकारी एवं कराधान विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर योजना का लाभ उठा सकेंगे। योजना जीएसटी लागू होने से पहले के सात प्रमुख कर कानूनों के अंतर्गत लंबित बकायों पर लागू होगी। इनमें हरियाणा मूल्य संवर्धन कर अधिनियम-2003, केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम-1956, हरियाणा विलासिता कर अधिनियम-2007, हरियाणा मनोरंजन शुल्क अधिनियम-1955, हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम-1973, हरियाणा स्थानीय क्षेत्र विकास कर अधिनियम-2000 तथा हरियाणा स्थानीय क्षेत्रों में माल के प्रवेश पर कर अधिनियम-2008 शामिल हैं। सरकार ने योजना के तहत छोटे करदाताओं को सबसे बड़ी राहत दी है। किसी भी आकलन वर्ष में यदि किसी करदाता का बकाया एक लाख रुपये तक है तो उसे ब्याज और जुर्माने सहित पूरी राशि की माफी मिल जाएगी। इसके लिए अलग से आवेदन करने की भी आवश्यकता नहीं होगी।
हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम-1973 के अंतर्गत विशेष राहत का प्रावधान किया गया है। इस कानून के तहत एक लाख रुपये तक की बकाया राशि पर 100 प्रतिशत टैक्स छूट मिलेगी, जबकि एक लाख रुपये से अधिक की राशि पर 70 प्रतिशत तक कर माफी दी जाएगी। इसके साथ ब्याज और पेनल्टी पूरी तरह माफ होगी। अन्य छह अधिनियमों के तहत भी स्लैब आधारित राहत दी गई है। एक लाख रुपये तक के बकाये पर 100 प्रतिशत, एक लाख से 10 लाख रुपये तक 60 प्रतिशत, 10 लाख से 1 करोड़ रुपये तक 50 प्रतिशत, 1 करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक 40 प्रतिशत, 10 करोड़ से 30 करोड़ रुपये तक 35 प्रतिशत तथा 30 करोड़ से 60 करोड़ रुपये तक 30 प्रतिशत कर छूट दी जाएगी। 60 करोड़ रुपये से अधिक के मामलों में कर छूट लागू नहीं होगी। इन सभी श्रेणियों में ब्याज और जुर्माने की 100 प्रतिशत माफी का प्रावधान रखा गया है।
सरकार ने भुगतान प्रक्रिया को भी आसान बनाया है। पांच लाख रुपये तक की निपटान राशि का भुगतान एकमुश्त करना होगा। पांच लाख से 25 लाख रुपये तक के मामलों में दो समान किस्तों में भुगतान की सुविधा दी गई है। 25 लाख रुपये से अधिक के मामलों में तीन किस्तों में भुगतान किया जा सकेगा। पहली किस्त आवेदन के साथ, जबकि बाकी किस्तें निर्धारित समयसीमा में जमा करनी होंगी। योजना में ‘डॉक्यूमेंट लिंक्ड वेवर’ का नया प्रावधान भी जोड़ा गया है। इसके तहत करदाता संबंधित अधिनियमों के वैधानिक दस्तावेज और फॉर्म जमा कर सकेंगे। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद टैक्स मांग का निपटान किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे वास्तविक करदाताओं को राहत मिलेगी और पुराने मामलों का तेजी से समाधान हो सकेगा।
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