अवैध उप-विभाजित औद्योगिक प्लाट होंगे नियमित

- मंत्रिमंडल की बैठक में नई पॉलिसी को मंजूरी

चंडीगढ़, 18 मई (हि.स.)। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को चंडीगढ़ में आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिसमें इंडस्ट्रियल प्लॉट्स के नए सब-डिवीजन और नगर निगम सीमा के अंदर पुनर्वास योजना में मौजूद गैर-कानूनी सब-डिवाइडेड इंडस्ट्रियल प्लॉट्स को रेगुलर करने के लिए एक पॉलिसी बनाने का प्रस्ताव है।

यह नीति उन औद्योगिक भूखंड मालिकों पर लागू होगी, जो नए उप-विभाजन की अनुमति प्राप्त करना चाहते हैं तथा उन औद्योगिक भूखंडों को नियमित करवाना चाहते हैं, जिन्हें पहले ही अवैध रूप से उप-विभाजित किया जा चुका है। ये भूखंड नगर पालिका सीमा के भीतर भारत सरकार के पुनर्वास मंत्रालय द्वारा विकसित पुनर्वास योजना क्षेत्रों में स्थित हैं।

नीति के अनुसार, मूल औद्योगिक भूखंड का न्यूनतम क्षेत्रफल एक एकड़ होना चाहिए तथा उसका संपर्क कम से कम 12 मीटर चौड़ी मौजूदा सडक़ से होना आवश्यक है। प्रत्येक उप-विभाजित अथवा नए उप-विभाजित भूखंड का न्यूनतम आकार 500 वर्ग गज से कम नहीं होगा। इसके अतिरिक्त, सभी उप-विभाजित भूखंडों में हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 के प्रावधानों के अनुरूप परिसर के भीतर पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।

नए उप-विभाजन अथवा पहले से अवैध रूप से उप-विभाजित भूखंडों के नियमितीकरण के इच्छुक आवेदकों को अपना आवेदन संबंधित नगर निगम क्षेत्रों में आयुक्त, नगर निगम तथा नगर परिषद या नगर समिति क्षेत्रों में जिला नगर आयुक्त को प्रस्तुत करना होगा। आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित प्राधिकारी निर्धारित नीति मानकों के अनुसार मामले की जांच करेगा और आवेदन प्राप्ति की तिथि से 60 दिनों के भीतर निर्णय लेगा। आवेदक को समय-समय पर जारी नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) तथा हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी सभी निर्देशों, मानकों और दिशानिर्देशों का पालन करना भी अनिवार्य होगा। सक्षम प्राधिकारी के निर्णय से असंतुष्ट कोई भी व्यक्ति, सक्षम प्राधिकारी द्वारा आदेश जारी किए जाने की तिथि से 60 दिनों के भीतर शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक के समक्ष अपील दायर कर सकेगा।

---------------

   

सम्बंधित खबर