सनातन गृहस्थी में मित्र बनकर सहयोग करती है पत्नी: स्वामी विमर्शानंद गिरि

जोधपुर, 27 जून (हि.स.)। स्वामी विमर्शानंदगिरि महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति में विवाह केवल सामाजिक अनुबंध नहीं, बल्कि एक वैदिक संस्कार और आजीवन धर्मयात्रा है। विवाह के समय लिए जाने वाले सप्तपदी के सात फेरे और सात मंत्र केवल रस्में नहीं हैं, बल्कि पति-पत्नी के संयुक्त जीवन का आध्यात्मिक एवं नैतिक संविधान हैं। इन सात प्रतिज्ञाओं में अन्न, आरोग्य, धर्म, समृद्धि, संतति, ऋतुचर्या, मित्रता, विश्वास, प्रेम और आजीवन साथ निभाने का संकल्प समाहित है। ये उद्गार परमहंस परिव्राजकाचार्य स्वामी ईश्वरानंदगिरि महाराज एवं स्वामी संवित् सोमगिरि महाराज के संन्यासी शिष्य तथा श्रीलालेश्वर महादेव मंदिर शिवबाड़ी बीकानेर के अधिष्ठाता स्वामी विमर्शानंदगिरि महाराज ने सरदारपुरा सी रोड स्थित सत्संग भवन में आयोजित तीन दिवसीय सत्संग सत्र गृहस्थ जीवन में साधना के द्वितीय दिवस के प्रवचन में व्यक्त किए।

स्वामीजी ने अपने प्रवचन में आगे कहा कि सप्तपदी के सातवें चरण में पति-पत्नी एक-दूसरे के सखा बनने का संकल्प लेते हैं। वैदिक मंत्र सखे सप्तपदा भव का अर्थ है- अब जब हमने सात कदम साथ चल लिए हैं, तब हम जीवनभर के मित्र बन गए हैं। यही कारण है कि सनातन परंपरा में पत्नी को केवल अर्धांगिनी ही नहीं, बल्कि जीवन की सच्ची सहधर्मिणी और श्रेष्ठ मित्र माना गया है। स्वामीजी ने कहा कि सनातन गृहस्थी में पत्नी कभी मित्र बनकर, कभी गुरु बनकर और कभी प्रेरणा बनकर सद गृहस्थी को सही दिशा देती है। कठिन परिस्थितियों में वह धैर्य का आधार बनती है, परिवार को जोडक़र रखती है, बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण करती है तथा पति को धर्ममार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है। भारतीय संस्कृति में पत्नी का स्थान केवल गृहलक्ष्मी का नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति और परिवार की प्रथम शिक्षिका का भी है।

इस दौरान सन्तोष व्यास ने संकीर्तन गान प्रस्तुत किया। सत्संग भवन के अध्यक्ष भगवतीलाल फूलरिया, दीपक जोशी, शेखर थानवी, इंद्रा जोशी, प्रवीण माथुर तथा डॉ ज्योति स्वरूप शर्मा ने स्वामीजी का माल्यार्पण किया। सभा का संचालन भरत जोशी ने किया। कार्यक्रम संयोजक प्रमोद गुर्जर ने बताया कि तीन दिवसीय सत्संग सत्र में स्वामी विमर्शानंदगिरि महाराज प्रतिदिन गृहस्थ जीवन में साधना विषय पर वैदिक एवं सनातन दृष्टिकोण से प्रवचन दे रहे हैं। रविवार को तीसरा व अंतिम सत्र होगा।

   

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