बिहार की छह प्रमुख सड़क परियोजनाओं की समीक्षा,समयबद्ध यूटिलिटी शिफ्टिंग के लिए हर विभाग में बनेगा नोडल अधिकारी
- DSS Admin
- Jul 08, 2026
पटना, 08 जुलाई (हि.स.)। बिहार में सड़क अवसंरचना परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं को दूर करने के उद्देश्य से पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल की अध्यक्षता में बुधवार को यूटिलिटी शिफ्टिंग को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग, ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और बाईपास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
बैठक में सचिव पंकज कुमार पाल ने कहा कि यूटिलिटी शिफ्टिंग और विभिन्न विभागों से मिलने वाली अनापत्ति (एनओसी) की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए प्रत्येक संबंधित विभाग में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा तथा विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर लंबित मामलों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करेगा।
उन्होंने भूमि हस्तांतरण, बिजली के पोल और हाईटेंशन लाइनों के स्थानांतरण, जलापूर्ति पाइपलाइन, नहर क्रॉसिंग और अन्य तकनीकी बाधाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर दूर करने का निर्देश दिया। सचिव ने स्पष्ट कहा कि जनहित से जुड़ी इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं में किसी भी स्तर पर देरी या शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से राज्य में परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी, आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और कृषि क्षेत्र को भी लाभ पहुंचेगा।
बिहार सरकार की ओर से जिन छह प्रमुख सड़क परियोजनाओं की समीक्षा की गई उनमें अरवल-बिहारशरीफ फोरलेन (एनएच-33), पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, मशरख-चकिया-भिट्ठामोड़ (राम जानकी मार्ग), जयनगर उत्तरी एवं दक्षिणी बाईपास (एनएच-227), जयनगर उत्तरी एवं दक्षिणी बाईपास (एनएच-227), बेतिया-मंगलपुर सड़क परियोजना, मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा फोरलेन (एनएच-22) एवं मणिकपुर-साहिबगंज मार्ग शामिल है।
अरवल-बिहारशरीफ फोरलेन (एनएच-33)
लगभग 89 किलोमीटर लंबी इस परियोजना से अरवल, जहानाबाद और नालंदा जिले आपस में जुड़ेंगे। परियोजना के मार्ग में आने वाले बिजली के पोल और हाईटेंशन लाइनों को हटाने के लिए संयुक्त सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। सचिव ने संबंधित अधिकारियों को प्राक्कलन जल्द अंतिम रूप देकर यूटिलिटी शिफ्टिंग का कार्य शुरू करने का निर्देश दिया।
पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे
पूर्वी और पश्चिमी बिहार को जोड़ने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के मार्ग में जलापूर्ति पाइपलाइन, चापाकल और सीवरेज संरचनाएं आ रही हैं। दरभंगा, समस्तीपुर और सहरसा प्रमंडलों के अधिकारियों को लंबित आकलनों को शीघ्र स्वीकृत कर मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए गए।
मशरख-चकिया-भिट्ठामोड़ (राम जानकी मार्ग)
धार्मिक महत्व की इस सड़क परियोजना के अंतर्गत सारण, गोपालगंज और पूर्वी चंपारण में विभिन्न नहरों पर बनने वाले क्रॉसिंग स्ट्रक्चर के लिए जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को संयुक्त निरीक्षण कर एक सप्ताह के भीतर अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) जारी करने का निर्देश दिया गया।
जयनगर उत्तरी एवं दक्षिणी बाईपास (एनएच-227)
जयनगर शहर को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के उद्देश्य से लगभग 20 किलोमीटर लंबे बाईपास का निर्माण किया जा रहा है। बाढ़ नियंत्रण विभाग के साथ संयुक्त सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और तकनीकी स्वीकृति के लिए जल संसाधन विभाग को अनुशंसा भेज दी गई है।
बेतिया-मंगलपुर सड़क परियोजना
पश्चिम और पूर्वी चंपारण को जोड़ने वाली इस परियोजना में विद्युत संरचनाओं और रेलवे क्रॉसिंग से संबंधित बाधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जा रहा है। मोतिहारी और बेतिया प्रमंडलों में यूटिलिटी शिफ्टिंग का कार्य तेज करने के निर्देश दिए गए।
मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा फोरलेन (एनएच-22) एवं मणिकपुर-साहिबगंज मार्ग
भारत-नेपाल सीमा को जोड़ने वाले 86.80 किलोमीटर लंबे इस मार्ग तथा मणिकपुर-साहिबगंज (एनएच-139डब्ल्यू) परियोजना में विभिन्न नहरों पर क्रॉसिंग स्ट्रक्चर बनाए जाने हैं। सचिव ने इन परियोजनाओं से संबंधित लंबित एनओसी इसी सप्ताह जारी करने का निर्देश दिया।
बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच), ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे तथा बाईपास परियोजनाओं के निर्माण में आ रही विभिन्न बाधाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। इनमें बिजली के पोल एवं तारों का स्थानांतरण, नहर क्रॉसिंग के लिए अनापत्ति, जलापूर्ति पाइपलाइनों की शिफ्टिंग तथा अन्य तकनीकी मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एनबीपीडीसीएल) के प्रबंध निदेशक राहुल कुमार, पथ निर्माण विभाग की विशेष सचिव डॉ. शैलजा शर्मा, साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एसबीपीडीसीएल) के प्रबंध निदेशक सौरभ जोरवाल, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) के अभियंता प्रमुख, जल संसाधन विभाग के अधिकारी, गेल के प्रतिनिधि तथा संबंधित विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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