पड़ोसी राज्यों की तुलना में उत्तराखंड के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन अधिक

देहरादून, 15 मई (हि.स.)। उत्तराखंड में श्रमिकों के न्यूनतम वेतन को लेकर जारी चर्चाओं के बीच पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और बिहार में श्रमिकों के लिए लागू न्यूनतम वेतन की तुलना में उत्तराखंड का वेतनमान अपेक्षाकृत बेहतर है। यह जानकारी देते उत्तराखंड श्रम विभाग ने कहा कि 781 रुपये प्रतिदिन वेतन लागू करने का काेई आदेश नहीं दिया गया है।

उत्तराखंड श्रम विभाग ने शुक्रवार काे बताया कि उत्तराखंड सरकार श्रमिकों के हितों के प्रति संवेदनशील है और विभिन्न उद्योगों के लिए निर्धारित न्यूनतम वेतन पहले ही घोषित किए जा चुके हैं। उत्तराखंड में वर्तमान में अकुशल श्रमिकों के लिए 13,800 रुपये, अर्द्धकुशल श्रमिकों के लिए 15,100 रुपये तथा कुशल श्रमिकों के लिए 16,900 रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन निर्धारित है। श्रम विभाग का दावा है कि राज्य में लागू वेतनमान कई पड़ोसी राज्यों की तुलना में बेहतर है।

श्रम विभाग ने बताया कि अप्रैल 2026 में इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए न्यूनतम वेतन घोषित किया गया था,जबकि गैर-इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए वीडीए भी जारी किया जा चुका है। विभाग ने सभी उद्योगों को वेतन और एरियर का भुगतान नियमानुसार करने के निर्देश दिए हैं। विभाग के अनुसार नए श्रम कानूनों के तहत केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय फ्लोर लेवल न्यूनतम वेतन घोषित किया जाना है। इसके बाद राज्य सरकार आवश्यकता के अनुसार न्यूनतम वेतन की समीक्षा करेगी।

विभाग का कहना है कि प्रधानमंत्री अथवा किसी सक्षम प्राधिकारी ने 781 रुपये प्रतिदिन वेतन लागू किए जाने की कोई घोषणा नहीं की गई है। यह दर केवल कुछ केंद्रीय उपक्रमों के विशेष वर्गों पर लागू है और राज्य के उद्योगों पर यह लागू नहीं है। श्रम विभाग ने सभी उद्योगों को न्यूनतम वेतन,ओवरटाइम और बोनस संबंधी प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही श्रमिकों से भ्रामक प्रचार और अफवाहों से बचने और औद्योगिक शांति बनाए रखने की अपील की गई है।

विभाग ने कहा कि किसी भी शिकायत के लिए श्रमिक अपने संबंधित सहायक श्रम आयुक्त से संपर्क कर सकते हैं। हल्द्वानी स्थित श्रम आयुक्त कार्यालय में चाैबीस घंटे कार्यरत रहने वाला कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है, जिसका दूरभाष नंबर 05946-282805 जारी किया गया है।

   

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