पश्चिम बंगाल में लगभग 100 एकड़ भूमि बीएसएफ को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू

कोलकाता, 20 मई (हि. स.)। पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत–बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से लगभग 100 एकड़ भूमि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह कदम सीमा पर बाड़बंदी और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए उठाया गया है।

सूत्रों के अनुसार, हस्तांतरित की जा रही भूमि में से 43 एकड़ से अधिक क्षेत्र पांच जिलों में सीमा बाड़बंदी कार्य के लिए चिह्नित किया गया है, जबकि लगभग 56 एकड़ सरकारी भूमि का उपयोग बीएसएफ के बॉर्डर आउटपोस्ट के निर्माण के लिए किया जाएगा। ये चौकियां अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग 200 मीटर की दूरी पर स्थापित की जाएंगी।

इसके अलावा सिलीगुड़ी के संवेदनशील “चिकन नेक” क्षेत्र के पास लगभग छह एकड़ भूमि भी बीएसएफ को दिए जाने पर विचार किया जा रहा है, जहां सुरक्षा के लिहाज से एक प्रस्तावित मुख्यालय स्थापित करने की योजना है।

अधिकारियों ने बताया कि यह भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया राज्य सरकार के कैबिनेट निर्णय के बाद आगे बढ़ाई जा रही है। इसके साथ ही एक वरिष्ठ बीएसएफ अधिकारी के कोलकाता में मुख्यमंत्री के साथ बैठक में शामिल होने की संभावना है।

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, मुर्शिदाबाद, मालदा, कूचबिहार, उत्तर 24 परगना और नदिया जैसे कई जिलों में भूमि अधिग्रहण पहले ही पूरा हो चुका है। नौ सीमावर्ती जिलों में शेष कार्यों के लिए अतिरिक्त अनुमति भी दी गई है।

सूत्रों ने बताया कि अकेले मुर्शिदाबाद में 24 एकड़ से अधिक भूमि चिह्नित की गई है, जबकि मालदा में लगभग 10 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है। कूचबिहार और उत्तर 24 परगना में भी छोटे भूखंडों की पहचान की गई है। दक्षिण दिनाजपुर में लगभग 9.8 एकड़ भूमि पहले ही जिला स्तर पर बीएसएफ को सौंप दी गई थी।

इस पहल का उद्देश्य पश्चिम बंगाल में भारत–बांग्लादेश सीमा के लगभग 456 किलोमीटर क्षेत्र में लंबित बाड़बंदी कार्य को पूरा करना है, जो भूमि अधिग्रहण से जुड़ी चुनौतियों के कारण लंबे समय से अटका हुआ था।

अधिकारियों ने कहा कि अधिग्रहित भूमि के लिए भूमि मालिकों को सरकारी मानक से चार गुना तक मुआवजा दिया जाएगा। भुगतान राज्य प्रशासन के माध्यम से किया जाएगा।

स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों ने कई सीमावर्ती ब्लॉकों में भूमि मालिकों के साथ परामर्श प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जिसमें मुर्शिदाबाद जैसे क्षेत्रों में सीमा से सटे गांवों में प्रारंभिक बैठकें शामिल हैं।

   

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