ब्रह्मचर्य से रोगों का नाश और आयु वृद्धि संभव-स्वामी राम स्वरूप जी

Eradication of diseases and extension of lifespan are possible through Brahmacharya – Swami Ram Swarup Ji.


कठुआ, 15 जून । वेद मन्दिर योल में आयोजित 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 65वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी योगाचार्य ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए अथर्ववेद के गूढ़ ज्ञान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि परमेश्वर ने अथर्ववेद के 19वें काण्ड में अत्यंत भयंकर रोगों के निवारण से संबंधित महत्वपूर्ण ज्ञान प्रदान किया है।

स्वामी जी ने सूक्त 24 का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले स्त्री-पुरुष अपनी शक्ति पर संयम रखते हैं जिससे शरीर में उत्पन्न होने वाले विभिन्न रोग स्वतः नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रह्मचर्य से उत्पन्न शक्ति सर्वोत्तम औषधि के समान है जो न केवल रोगों का नाश करती है बल्कि आयु में भी वृद्धि करती है। उन्होंने आगे बताया कि अथर्ववेद में इस शक्ति को जङ्गिडः नाम दिया गया है जो वात, पित्त और कफ से उत्पन्न सभी विकारों को समाप्त कर शरीर को निरोग बनाती है।

स्वामी राम स्वरूप ने सूक्त 37 के मन्त्र 1 से 4 का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें ईश्वर से प्रार्थना की गई है कि वह दिव्य तेज मनुष्य को प्राप्त हो जो काम, क्रोध, मद और लोभ जैसे आंतरिक शत्रुओं का नाश करता है तथा शरीर में ओज उत्साह और सामर्थ्य प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि यह समस्त शक्ति केवल दृढ़ ब्रह्मचर्य के पालन से प्राप्त होती है। इसके लिए वेदाध्ययन, योगाभ्यास, यज्ञ और अग्निहोत्र का नियमित पालन अत्यंत आवश्यक है। अंत में स्वामी जी ने चेताया कि यदि मनुष्य इन वैदिक मार्गों का अनुसरण नहीं करता तो वह रोग दुःख चिंता और कष्टों से भरे जीवन को जीने के लिए विवश रहेगा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और उन्होंने वैदिक उपदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

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