असम के चार आरक्षित वन से अतिक्रमण हटाने का हाईकोर्ट का आदेश

गुवाहाटी, 10 जून (हि.स.)। गौहाटी हाईकोर्ट ने असम के नगांव जिले स्थित लुतुमारी आरक्षित वन क्षेत्र समेत चार वन क्षेत्रों में रह रहे अवैध कब्जाधारियों को 30 दिनों के भीतर वन भूमि खाली करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति देवाशीष बरुवा ने याचिकाओं के एक समूह का निस्तारण करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा से जुड़े सार्वजनिक अधिकार, आरक्षित वन क्षेत्र में रह रहे व्यक्तियों के निजी दावों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।

अदालत ने आदेश दिया कि अतिक्रमणकारी निर्धारित 30 दिनों के भीतर अपना सामान हटाकर वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करें। साथ ही असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एपीडीसीएल) को निर्देश दिया गया है कि समयसीमा समाप्त होने के तुरंत बाद संबंधित क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी जाए।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कब्जाधारी स्वेच्छा से भूमि खाली नहीं करते हैं तो जिला प्रशासन को व्यापक बेदखली अभियान चलाने का अधिकार होगा। अदालत ने याचिकाकर्ताओं के दावों को खारिज करते हुए कहा कि वे अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के तहत किसी भी वैध अधिकार या पात्रता को साबित नहीं कर सके।

यह फैसला असम के चार आरक्षित वनों में लंबे समय से जारी अतिक्रमण के मामलों से जुड़ा है। इनमें नगांव जिले के लुतुमारी और बोरपानी, होजाई जिले के जमुना मौदंगा तथा गोलाघाट जिले के साउथ नाम्बोर एवं दोयांग आरक्षित वन शामिल हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के बिना आरक्षित वन भूमि का उपयोग स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र, सामुदायिक भवन या सड़क जैसी आधारभूत संरचनाओं के निर्माण के लिए नहीं किया जा सकता। साथ ही भविष्य में किसी भी नए अतिक्रमण या अवैध प्रवेश की स्थिति में लापरवाही बरतने वाले वन अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

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