भारत-जापान ने तैयार किया आर्थिक सुरक्षा रोडमैप, रणनीतिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला की जाएगी मजबूत

नई दिल्ली, 02 जुलाई (हि.स.)। भारत और जापान ने आज आर्थिक सुरक्षा के लिए एक संयुक्त रोड मैप को मंजूरी दी जिसके माध्यम से दोनों देश सेमीकंडक्टर, क्वांटम और एडवांस्ड पदार्थ जैसे रणनीतिक क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला को लचीला और मजबूत बनाने के लिए 100 खरब येन के भारी भरकम निवेश के साथ काम करेंगे। इसके अलावा जापान के साथ मिल कर भारत में एक हजार बाॅयाेगैस संयंत्र स्थापित किये जाने पर भी सहमति बनी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र माेदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने गुरुवार काे यहां हैदराबाद हाउस में 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में परस्पर संबंधाें काे भाई बहन के रिश्ते के काेमल धागे से बांधा ताे पूरा वातावरण राेमांचित हाे गया। दाेनाें देशाें के बीच करीब दाे घंटे तक चली बैठक के बाद परस्पर सहयाेग के चार ज्ञापनों पर हस्ताक्षर एवं आदान प्रदान किया गया। इनमें भूगर्भीय खनिजों की खोज, फार्मास्युटिकल्स एवं मेडिकल उपकरण, बैटरी निर्माण और बायाेगैस एवं जैविक खाद के संयंत्राें की स्थापना में सहयाेग के दस्तावेज शामिल हैं। इसके अलावा दोनों देशों ने आज एआई के क्षेत्र में एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया है और साथ ही रक्षा क्षेत्र में संयुक्त विकास परियोजना पर सहमति जताई।

इससे पहले जापानी प्रधानमंत्री का आज सुबह राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी समकक्ष ताकाइची के बीच वार्ता हुई। बाद में संयुक्त वक्तव्य में प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी प्रधानमंत्री को मेरी छोटी बहन प्रधानमंत्री ताकाइची जी कह कर पुकारा तो प्रधानमंत्री ताकाइची भावुक हो गईं। उन्होंने भी अपने वक्तव्य में प्रधानमंत्री को मेरे बड़े भाई प्रधानमंत्री मोदी कह कर पुकारा और कहा, आपने मुझे एक प्यारी छोटी बहन कहा, लेकिन बड़ी बैठक से पहले हुई छोटी बैठक में हमने पक्का किया कि हम एक ही सोच रखते हैं और इस रिश्ते को भाई-बहन की तरह ही आगे बढ़ाएंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगले 10 सालों में भारत जापान से 100 खरब येन (जापानी मुद्रा) के निवेश और देश में काम कर रही जापानी कंपनियों की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।

भारत और जापान की अर्थव्यवस्था को पूरक बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, भारत और जापान की अर्थव्यवस्थाएं पूरक हैं। सांस्कृतिक मूल्यों से लेकर आधुनिक टेक्नोलॉजी तक, हमारी सोच और दृष्टिकोण में भी समानता है।

और सबसे बढ़कर, हमारे संबंधों की नींव अटूट आपसी विश्वास पर टिकी है। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी यह विशेष साझेदारी, सशक्त और समृद्ध जापान के आपके विजन, विकसित भारत के हमारे संकल्प और विश्व की प्रगति को, नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

एक सशक्त और समृद्ध जापान का आपका विजन, विकसित भारत का हमारा संकल्प, और पूरे विश्व की प्रगति को मिलकर साकार करें।। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि वैश्विक उथल-पुथल के माहौल में आपसी विश्वास दोनों देशों के लिए बड़ी रणनीतिक पूंजी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने वार्ता में बनी सहमति और निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि आज के अनिश्चितता भरे युग में, भारत और जापान दोनों आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा का महत्व अच्छी तरह समझते हैं। इसी दिशा में आज हमने आर्थिक सुरक्षा के लिए एक संयुक्त रोडमैप तैयार किया है। इसके माध्यम से हम सेमीकंडक्टर, क्वांटम, और उन्नत सामग्री जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला की सातत्यता को मजबूत करेंगे।

ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी आज हमने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। भारत-जापान बायो-गैस पहल के माध्यम से हम भारत में एक हजार बायो-गैस और जैविक खाद संयंत्र लगाने में सहायता मिलेगी। इससे हमारी गोवर्धन पहल और मजबूत होगी।

इससे भारत के गांवों में स्थिरता, समृद्धि, और ग्रामीण आजीविका, को नई शक्ति मिलेगी। तेल के झटके जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए आज हमने ऊर्जा रेजिलिएंस पर भी एक महत्वपूर्ण पहल की है। साथ ही, बैटरी, ग्रीन हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा में हमारा सहयोग, विश्व के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

भारत और जापान मिलकर आर्थिक सुरक्षा को साझा सुरक्षा, और ऊर्जा संक्रमण को साझा अवसर के रूप में लेते हैं, और उसे आगे बढ़ने की दिशा में हम काम करेंगे, उसे बदलेंगे।

अपने वक्तव्य में मोदी ने कहा कि दोनों देशों में तकनीकी सहयोग साझेदारी का मजबूत स्तंभ बना हुआ है। इसी विजन को साकार करते हुए आज एआई के क्षेत्र में दोनों देशों ने एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया है। जापान की तकनीकी क्षमता और भारत की सॉफ्टवेयर क्षमता का संगम वैश्विक एआई विकास को नई गति और शक्ति देगा। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि रक्षा के क्षेत्र में दोनों देश भारत और जापान के पहले संयुक्त विकास परियोजना पर सहमत हुए हैं।

स्वास्थ्य के क्षेत्र का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विशाल क्षमता और जापान की गुणवत्ता विश्व को किफायती, विश्वसनीय और उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने में सक्षम है। भारत जापान के बीच निवेश साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। पिछले एक वर्ष में लगभग 120 नए व्यावसायिक समझौता पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इससे भारत में 10 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का जापानी निवेश आएगा।

जापानी समकक्ष के साथ संयुक्त वक्तव्य में प्रधानमंत्री ने एक बार फिर मुक्त, समृद्ध और नियम आधारित व्यवस्था वाले हिन्द-प्रशांत के प्रति समर्थन को दोहराया।

जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने कहा, जापान और भारत को मिलकर मज़बूत और समृद्ध बनने के लिए अपनी-अपनी ताकतों का इस्तेमाल करना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय हालात में उथल-पुथल के बीच, एक-दूसरे के पूरक और सहयोग वाले ऐसे रिश्ते बनाना और भी ज़रूरी हो गया है। इसी नज़रिए से, जब प्रधानमंत्री मोदी और मैंने अलग-अलग मुद्दों पर बातचीत की, तो हमें उन कई लक्ष्यों की फिर से याद आई जो हम दोनों के साझे हैं। हमने अपने सहयोग के केंद्र में इन तीन बातों को रखने पर सहमति जताई। पहला, जापान और भारत के बीच रणनीतिक सहयोग को और गहरा करना। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात में हम जिस तरह की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाना चाहते हैं, उसे लेकर हमारे दोनों देशों की सोच एक जैसी है। मैंने हाल ही में अपडेटेड एफओआईपी (फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक) की घोषणा की है, जो एफओआईपी को साकार करने के लिए आत्मनिर्भरता और मज़बूती पर ज़ोर देता है। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री मोदी समुद्र को एक ऐसी साझा जगह मानते हैं जो क्षेत्रीय स्थिरता और विकास में मदद करती है। वे 'महासागर' पहल को बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि हिंद महासागर के आस-पास के देश अपनी संप्रभुता और समुद्र की रक्षा खुद कर सकें; यह पहल पूरी तरह से एफओआईप के अनुरूप है। इस तरह, हम ऐसे साझे लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जापान और भारत के बीच रणनीतिक सहयोग को और गहरा करने पर सहमत हुए। क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए समुद्री सुरक्षा सहयोग का विस्तार खास तौर पर अहम है।

ताकाइची ने कहा, जापान की मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स का एक डिस्ट्रॉयर और भारतीय नौसेना का एक जहाज मिलकर अभ्यास करने की योजना बना रहे हैं। हम हिंद महासागर में अभ्यास बढ़ाएंगे, नौसेना के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल में सहयोग को बढ़ावा देंगे और 'मेक इन इंडिया' फ्रेमवर्क के तहत उपकरणों के मामले में सहयोग को मजबूत करेंगे। इस तरह के सहयोग को और गहरा करने के लिए, मैंने संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे बातचीत करें और साल खत्म होने से पहले अगली जापान-भारत 2+2 बैठक आयोजित करें। दूसरी बात, आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में जापान-भारत सहयोग को बढ़ावा देना है। चूंकि दोनों देशों को आर्थिक हथियार बनाने और गैर-बाजार प्रथाओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए हमें अपनी महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन में मजबूती लाने की तत्काल आवश्यकता है। इसके अलावा, मध्य पूर्व की स्थिति से प्रभावित ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में, जापान और भारत दोनों की जिम्मेदारी है कि वे पूरे क्षेत्र के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करें, जैसा कि मैंने 'पावर एशिया' में बताया था। इसीलिए हमने सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के लिए एक दस्तावेज जारी किया है - 'पावर एशिया पहल' के तहत आर्थिक सुरक्षा सहयोग के लिए ठोस कदम उठाने का एक संयुक्त बयान; हम भारत के पेट्रोलियम भंडारण प्रणाली को मजबूत करने के लिए द्विपक्षीय बातचीत शुरू करेंगे। जापान, आईईए में भारत की सदस्यता का भी समर्थन करता है। ऊर्जा परिवर्तन के क्षेत्र में, भारत ने 1,000 बायोगैस प्लांट बनाने के लिए गाय के गोबर से ऊर्जा प्राप्त करने हेतु सहकारी समितियों का लाभ उठाने का लक्ष्य रखा है।

उन्होंने कहा कि हम 'जापान-भारत कोऑपरेटिव बायोगैस फॉर ग्रोथ' (सीबीजी) पहल शुरू कर रहे हैं, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने पेश किया है। तीसरा मकसद निवेश और इनोवेशन में सहयोग के ज़रिए भारत और जापान, दोनों की आर्थिक वृद्धि को मिलकर आगे बढ़ाना है। हम एक मज़बूत अर्थव्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध हूँ और 17 रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश के ज़रिए जापान की सप्लाई और टेक्नोलॉजी से जुड़ी क्षमताओं को बढ़ाने का लक्ष्य रखते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने 'विकसित भारत' पहल शुरू की है, जिसका राष्ट्रीय लक्ष्य 2047 तक एक विकसित देश बनना है और वे भारत की विकास यात्रा को तेज़ी से आगे बढ़ा रहे हैं। इस तरह, भविष्य में निवेश के ज़रिए अपने देशों को मज़बूत और समृद्ध बनाने का लक्ष्य हम दोनों का साझा है। जापान से आए प्रतिनिधिमंडल में शामिल बिज़नेस कम्युनिटी के प्रतिनिधि हमारे दोनों देशों के इन साझा लक्ष्यों को हासिल करने में ज़ोरदार समर्थन दे रहे हैं। इस दौरे के दौरान, भारतीय और जापानी कंपनियों के बीच सहयोग से जुड़े लगभग 120 समझौतों की घोषणा की गई, जिनमें 2 ट्रिलियन येन के निवेश का मामला भी शामिल है।

ताकाइची ने कहा, हमारी इच्छा है कि सरकारी और निजी क्षेत्रों के मिले-जुले प्रयासों से भारत और जापान में भविष्य की राह तैयार की जाए। अगले साल हमारे राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ है और हम इस मौके का फ़ायदा उठाकर 'भारत-जापान विशेष रणनीतिक वैश्विक साझीदारी' के तहत अपने दोनों देशों के लोगों को और करीब लाना चाहते हैं, ताकि हम रणनीतिक दिशा साझा करने वाले भरोसेमंद साझेदार बन सकें। मुझे विश्वास है कि मेरे बड़े भाई प्रधानमंत्री मोदी के साथ मिलकर भारत-जापान संबंध एक नए दौर में प्रवेश करेंगे। मैं अगली बार जापान में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने के लिए उत्सुक हूँ।

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