कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को दी टिकाऊ और लाभकारी खेती की वैज्ञानिक सीख

जिले के किसानों को दी गई टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि पद्धतियों की जानकारी

विशेष जागरूकता कार्यक्रम का हुआ आयोजन

धमतरी, 01 जुलाई (हि.स.)। कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी द्वारा जिले के किसानों को टिकाऊ, वैज्ञानिक और लाभकारी कृषि पद्धतियों से जोड़ने के उद्देश्य से वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डाॅ. ईश्वर सिंह के मार्गदर्शन में खेत बचाओ अभियान के तहत बुधवार को धमतरी, कुरूद, मगरलोड और नगरी विकासखंड के विभिन्न गांवों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

अभियान के दौरान किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, फसल विविधीकरण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के अनुरूप खेती, उन्नत कृषि तकनीकों के उपयोग तथा उत्पादन लागत कम कर अधिक लाभ अर्जित करने के वैज्ञानिक उपायों की जानकारी दी गई। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग, एक ही फसल की लगातार खेती तथा फसल अवशेष जलाने जैसी प्रवृत्तियों से मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार प्रभावित हो रही है। इससे बचने के लिए मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरकों का उपयोग, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, हरी खाद, जैव उर्वरकों का प्रयोग तथा फसल चक्र अपनाना आवश्यक है। किसानों को दलहनी एवं तिलहनी फसलों का रकबा बढ़ाने, जल संरक्षण करने और आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग के लिए भी प्रेरित किया गया।

वैज्ञानिक मनीषा खापर्डे ने कहा कि खेत की मिट्टी को स्वस्थ बनाए रखना ही भविष्य की टिकाऊ कृषि का आधार है। उन्होंने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करने, मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने, फसल अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर दिया। वैज्ञानिक प्रेमलाल साहू ने कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कृषि विभाग की योजनाओं, उन्नत बीजों के उपयोग, समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन तथा आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देते हुए किसानों से समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन लेकर वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करने का आग्रह किया। वैज्ञानिक डॉ. दीपिका चंद्रवंशी ने उद्यानिकी फसलों की व्यावसायिक खेती, फल एवं सब्जी उत्पादन, पोषण वाटिका, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली, पौध संरक्षण तथा अधिक आय देने वाली उद्यानिकी फसलों की वैज्ञानिक खेती की जानकारी देते हुए कहा कि पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।

वहीं वैज्ञानिक डॉ. नेहा गावंडे ने मृदा परीक्षण, मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने, सूक्ष्म पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग तथा दीर्घकालीन मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के उपायों पर विस्तार से जानकारी देते हुए किसानों को प्रत्येक दो से तीन वर्ष में मृदा परीक्षण कराने और रिपोर्ट के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की कृषि संबंधी समस्याओं का समाधान भी किया गया तथा वैज्ञानिकों ने उनके प्रश्नों के व्यावहारिक उत्तर दिए। किसानों ने अभियान की सराहना करते हुए इसे बेहद उपयोगी बताया और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की। अभियान में धमतरी, कुरूद, मगरलोड एवं नगरी विकासखंड के विभिन्न गांवों के किसान, कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, कृषि विज्ञान केंद्र धमतरी के वैज्ञानिक एवं विषय विशेषज्ञ उपस्थित

रहे।

   

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