कोकराझाड़ में बाढ़ से निपटने की तैयारियों की जिला आयुक्त ने की समीक्षा
- DSS Admin
- Jun 17, 2026
कोकराझाड़ (असम), 17 जून (हि.स.)। आसन्न मानसून और संभावित बाढ़ की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के उद्देश्य से कोकराझाड़ जिला प्रशासन एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की ओर से बुधवार को जिला आयुक्त कार्यालय के सम्मेलन कक्ष में एक व्यापक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला आयुक्त पंकज चक्रवर्ती ने की, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारी, सर्किल अधिकारी एवं क्षेत्रीय स्तर के कर्मियों ने भाग लिया।बैठक के दौरान जिला आयुक्त ने जिले की बाढ़ पूर्व तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए सभी विभागों को आपसी समन्वय बनाए रखने तथा किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। राहत शिविरों की व्यवस्था, जल निकासी योजना, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और विभागों के बीच समन्वय पर विस्तार से चर्चा की गई।प्रशासन ने जानकारी दी कि जिले में कुल 183 राहत शिविर एवं राहत वितरण केंद्र चिन्हित किए गए हैं, जिनके लिए शिविर प्रभारी भी नियुक्त किए जा चुके हैं। जिला एवं उप-मंडल स्तर पर राहत शिविर निगरानी दल गठित किए गए हैं, जबकि राजस्व सर्किल स्तर पर टास्क फोर्स समितियों का गठन कर उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।इसके अलावा आशा कर्मियों, एएनएम, आंगनबाड़ी कर्मियों, विद्यालय शिक्षकों तथा अन्य अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों को राहत शिविर प्रबंधन एवं बाढ़ प्रतिक्रिया संबंधी प्रशिक्षण भी दिया गया है।समीक्षा बैठक में बताया गया कि जिले के 289 गांवों को बाढ़ संभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित कर उनके लिए फ्लड हजार्ड मैप तैयार किए गए हैं। साथ ही बच्चों, गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं, बुजुर्गों तथा दिव्यांग व्यक्तियों सहित संवेदनशील वर्गों का गांववार डाटाबेस भी तैयार किया गया है।जिला प्रशासन ने विभिन्न विभागों के लिए तैयारियों एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया योजनाओं के साथ-साथ जिला स्तरीय बाढ़ आकस्मिकता एवं प्रतिक्रिया योजना भी तैयार की है, जिसमें आपदा के दौरान सभी एजेंसियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई हैं।बैठक में जिला आयुक्त पंकज चक्रवर्ती ने एसडीआरएफ, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं, सिविल डिफेंस, आपदा मित्र स्वयंसेवकों तथा गैर-सरकारी संगठनों के साथ समन्वय व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता सहित सभी आवश्यक संसाधनों को सुनिश्चित करने पर बल दिया।जिला आयुक्त ने सभी विभागों को सतर्क रहने, जमीनी स्तर पर समन्वय मजबूत करने तथा बाढ़ के दौरान जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी निवारक एवं राहत उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए।

