(लीड) मप्र विधानसभा के मानसून सत्र में पेश होगा यूसीसी विधेयक, मुख्यमंत्री ने दिए संकेत
- DSS Admin
- Jun 17, 2026
भोपाल, 17 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को स्पष्ट संकेत दिए कि विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश किया जाएगा और सरकार इसे इसी सत्र में पारित कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश नाथ काटजू की जयंती पर विधानसभा परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह के बाद मीडिया से बातचीत में संकेत दिए कि सरकार यूसीसी विधेयक इसी सत्र में विधानसभा में लाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सब कुछ योजना के अनुरूप रहा तो यह इसी सत्र में पारित भी हो जाएगा।
मुख्यमंत्री के इस बयान से स्पष्ट है कि राज्य सरकार यूसीसी को लेकर केवल चर्चा के स्तर पर नहीं, बल्कि उसे कानून का स्वरूप देने की ठोस योजना के साथ अपने कदम बढ़ा चुकी है। सरकार का लक्ष्य इस वर्ष दीपावली तक प्रदेश में यूसीसी को पूरी तरह लागू करना है।
मध्य प्रदेश में यदि यूसीसी विधेयक पारित होकर लागू किया जाता है तो उत्तराखंड और गुजरात के बाद इस कानून को लागू करने वाला वह देश का तीसरा राज्य बन जाएगा। हालांकि अभी हाल में असम सरकार ने भी विधानसभा में यूसीसी विधेयक पारित किया है, लेकिन इसके लागू होने में अभी कुछ समय लग सकता है।
मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। इस बार सबसे अधिक चर्चा यूसीसी विधेयक को लेकर ही है।
यूसीसी को लागू करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित और व्यावहारिक बनाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने 27 अप्रैल को छह सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। समिति में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, कानूनी विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद् गोपाल शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता बुद्धपाल सिंह सहित अन्य सदस्य शामिल किए गए हैं।
समिति को राज्य में यूसीसी की व्यवहारिकता का अध्ययन करने, विभिन्न वर्गों से सुझाव लेने और मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसमें कि सरकार ने समिति को गठन के 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट और प्रारूप विधेयक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। अब यह प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
यूसीसी को लेकर सरकार ने केवल विशेषज्ञों की राय तक खुद को सीमित नहीं रखा। समिति ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया और समाज के अलग-अलग वर्गों से संवाद स्थापित किया। इसके अलावा आम नागरिकों के सुझाव लेने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया। सरकार का दावा है कि अंतिम मसौदा जनता की राय और सामाजिक संवाद के आधार पर तैयार किया जा रहा है ताकि कानून अधिक व्यावहारिक और व्यापक स्वीकार्यता वाला बन सके।
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