दुर्गापुर में प्री-बजट परामर्श बैठक में उद्योगों को राहत देने का भरोसा

पश्चिम बर्दवान, 15 जून (हि. स.)। राज्य में उद्योग और निवेश के माहौल को बेहतर बनाने के उद्देश्य से रविवार शाम दुर्गापुर के सिटी सेंटर स्थित एक निजी होटल में सात जिलों के उद्योगपतियों और उद्यमियों के साथ प्री-बजट परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य की नगर विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल, वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) प्रभाकर कुमार मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे।

बैठक में आसनसोल, दुर्गापुर, बांकुड़ा, पुरुलिया, बीरभूम सहित सात जिलों के उद्योग संगठनों, चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों और उद्यमियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान उद्योग जगत से जुड़े लोगों ने अपनी समस्याएं, निवेश संबंधी चुनौतियां और उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को सरल बनाने के सुझाव रखे।

नगर विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान उद्योगपतियों को वर्षों तक विभिन्न सरकारी विभागों के चक्कर लगाने पड़े, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में व्यवसायियों से घूस लेने के बाद भी काम पूरे नहीं किए गए, जिससे राज्य की औद्योगिक छवि प्रभावित हुई।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार उद्योगों के लिए पारदर्शी और तेज व्यवस्था तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया को आसान बनाने तथा सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया।

वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने भी पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आधारभूत ढांचे के विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जिससे निवेश प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि कई औद्योगिक क्षेत्रों की सड़कें जर्जर हैं और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण रोजगार के अवसर घटे हैं। इसके चलते बड़ी संख्या में युवाओं और श्रमिकों को दूसरे राज्यों में रोजगार की तलाश करनी पड़ रही है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने, भूमि संबंधी समस्याओं का समाधान करने और नए निवेश को आकर्षित करने की दिशा में काम कर रही है। साथ ही दावा किया कि उद्योग, रोजगार और आधारभूत ढांचे के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

बैठक के दौरान यह भी कहा गया कि आसनसोल-दुर्गापुर क्षेत्र की बंद पड़ी फैक्ट्रियों को दोबारा शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा दुर्गापुर बैराज के विकल्प के तौर पर दूसरे बैराज के निर्माण के प्रस्ताव पर भी विचार चल रहा है।

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