सीबीआई ने बैंक घोटाले में यूटी कैडर के आईएफएस अधिकारी को किया गिरफ्तार

चंडीगढ़, 17 जून । केंद्रीय जांच ब्यूरो ने यूटी चंडीगढ़ में हुए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले की जांच करते हुए सीनियर इंडियन फ़ॉरेस्ट सर्विस अधिकारी नवनीत श्रीवास्तव को गिरफ़्तार किया है।

वह आईडीएफसी बैंक अकाउंट से फंड के गलत इस्तेमाल के मामले में चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (क्रेस्ट), चंडीगढ़ के तत्कालीन सीईओ थे। उन्हें बुधवार को सीबीआई के स्पेशल जज के सामने पेश किया गया और उन्हें तीन दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया।

सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है। मंगलवार को इस मामले में सीबीआई की तरफ से चार्जशीट फाइल करते समय संकेत दिया गया था कि जांच अभी जारी है और कई गिरफ्तारियां संभावित हैं। नवनीत श्रीवास्तव की गिरफ़्तारी मामले की चल रही जांच के दौरान उनकी भूमिका सामने आने के बाद की गई। जांच से पता चला कि तीन बैंक अकाउंट में रखे फंड को धोखाधड़ी से अलग-अलग शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया गया और लाभार्थियों ने इसे निजी इस्तेमाल के लिए बदल लिया। इससे क्रेस्टचंडीगढ़ को लगभग 75 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जब वे इसके प्रमुख थे।

जांच में यह भी पता चला कि अपराध से मिली रकम का एक हिस्सा एक प्राइवेट कंपनी के अकाउंट में भेजा गया, जिसमें उनकी पत्नी और एक करीबी रिश्तेदार डायरेक्टर हैं। इस मामले में क्रेस्ट के तत्कालीन प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर सिंह अब्रोल और अकाउंटेंट साहिल कुक्कर को पहले ही गिरफ़्तार किया जा चुका है और उनके ख़िलाफ़ चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है; वे अभी ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं।

सीबीआई ने इस मामले की जांच इकोनॉमिक ऑफ़ेंस पुलिस स्टेशन, चंडीगढ़ से अपने हाथ में ली थी। सीबीआई ने हाल ही में इस मामले में 13 आरोपियों के ख़िलाफ़ पहली चार्जशीट दाखिल की थी, जिनमें प्राइवेट बैंक के पांच अधिकारी, क्रेस्ट (चंडीगढ़ यूटी प्रशासन) के दो सरकारी कर्मचारी, दो शेल कंपनियां (और उनके तीन पार्टनर/डायरेक्टर) और एक प्राइवेट व्यक्ति शामिल हैं। सभी आरोपी अभी ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं।

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