श्री अकाल तख्त के फैसले का सिख यूनाइटेड फ्रंट ने किया स्वागत, धार्मिक मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप पर जताई चिंता

श्री अकाल तख्त के फैसले का सिख यूनाइटेड फ्रंट ने किया स्वागत, धार्मिक मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप पर जताई चिंता


जम्मू, 02 जुलाई । सिख यूनाइटेड फ्रंट जम्मू-कश्मीर के चेयरमैन सरदार सुदर्शन सिंह वजीर ने विभिन्न सिख संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ आयोजित एक प्रेसवार्ता में पंजाब सरकार द्वारा पारित ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम-2026’ को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा उठाए गए कदम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्च धार्मिक संस्था के रूप में उसकी गरिमा और अधिकार सर्वोपरि हैं। प्रेसवार्ता की शुरुआत उन्होंने अकाल तख्त महान है, सिख पंथ दी शान है के उद्घोष के साथ की। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि श्री अकाल तख्त साहिब ने समय-समय पर बड़े से बड़े व्यक्तियों को भी जवाबदेह ठहराया है। उन्होंने जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज द्वारा विभिन्न राजनीतिक दलों के विधायकों को तलब किए जाने के निर्णय को सराहनीय बताते हुए कहा कि इससे धार्मिक संस्थाओं की गरिमा और जवाबदेही की परंपरा मजबूत हुई है।

सुदर्शन सिंह वजीर ने कहा कि यदि कुछ विधायकों ने बिना विधेयक पढ़े उसे पारित करने की बात स्वीकार की है, तो यह विधायी प्रक्रिया में गंभीर चूक को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म से जुड़े विषयों पर राजनीति को प्राथमिकता देने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि सिख दर्शन में धर्म को सदैव सर्वोच्च स्थान प्राप्त है और वही शासन को नैतिक दिशा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि दुनिया का कोई भी लोकतांत्रिक देश बाइबिल, पवित्र कुरान या अन्य धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या के लिए कानून नहीं बनाता, इसलिए सिख धार्मिक मामलों में भी ऐसी विधायी व्याख्या उचित नहीं है। उन्होंने सिख गुरुद्वारा अधिनियम-1925 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल गुरुद्वारों के प्रबंधन और प्रशासन को व्यवस्थित करना था, न कि सिख सिद्धांतों की व्याख्या करना।

वजीर ने तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब, नांदेड़ के प्रबंधन से जुड़े प्रस्तावित संशोधनों पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रबंधन समिति में सरकार द्वारा नामित सदस्यों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव का विश्वभर के सिख समुदाय ने विरोध किया है और फिलहाल इस प्रस्ताव को स्थगित रखा गया है। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय ने सदैव न केवल अपने धर्म बल्कि सभी धर्मों की रक्षा, न्याय, मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए बलिदान दिए हैं। देश की आजादी की लड़ाई से लेकर 1947-48, 1965, 1971 और कारगिल युद्ध तक सिखों का योगदान अतुलनीय रहा है। उन्होंने 1971 के युद्ध में जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के नेतृत्व को भी देश के लिए गौरवपूर्ण बताया।

किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद कृषि कानूनों को वापस लिया गया, जिसमें कई सिखों ने अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सिख धार्मिक संस्थाओं की रक्षा के लिए कोई निर्देश जारी करते हैं, तो दुनिया भर का सिख समुदाय शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से उनके नेतृत्व में एकजुट होकर खड़ा होगा।

   

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