अमरनाथ यात्रा के लिए साधुओं का जम्मू पहुंचने के साथ ही आध्यात्मिक उत्साह बढ़ा

जम्मू, 15 जून (हि.स.)। 3 जुलाई से शुरू होने वाली 57 दिनों की सालाना अमरनाथ यात्रा से पहले कई साधु और आध्यात्मिक साधक पुराने शहर के राम मंदिर में पहुंचने और ठहरने लगे हैं। यह मंदिर यात्रा पर निकलने से पहले एक प्रमुख ट्रांज़िट सेंटर है। यात्रा आधिकारिक रूप से शुरू होने से हफ़्तों पहले ही मंदिर में साधुओं का आना-जाना शुरू हो गया है। वे दक्षिण कश्मीर हिमालय में 3,880 मीटर ऊंचे गुफा मंदिर की यात्रा की तैयारी करते हुए अपना समय प्रार्थना, धार्मिक चर्चा और सेवा में बिताते हैं।

उनके द्वारा रोज़ मंदिर में भजन गूंज रहे हैं और बम बम भोले के जयकारे वातावरण को भक्तिमई बना रहे हैं। अयोध्या के साधु अमर दास ने कहा कि वे मंदिर में ठहरे साथी संतों की सेवा करने के लिए यात्रा से डेढ़ महीने पहले ही आ गए थे। उन्होंने कहा कि मैं संतों और भगवान के भक्तों की सेवा करता हूं और मैं किचन और खाने-पीने की सभी व्यवस्थाओं को संभालने में भी मदद करता हूं। दास जो 2014 से अमरनाथ यात्रा कर रहे हैं ने कहा कि राम मंदिर में संतों और तीर्थयात्रियों की सेवा करने से उन्हें बहुत खुशी मिलती है। पिछले साल उन्हें लकवा मार गया था। उन्होंने कहा कि मैंने महादेव से प्रार्थना की 'कृपया मुझे आपके दर्शन करने का एक आखिरी मौका दें।' डॉक्टरों की सलाह के बावजूद मैंने यात्रा पूरी की और कई कम्युनिटी किचन में सेवा की।

हिमाचल प्रदेश के गणेश पुरी ने बताया कि वे तीन दशकों से ज़्यादा समय से इस यात्रा पर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस साल मज़बूत सुरक्षा इंतज़ामों और सभी के सहयोग से यह तीर्थयात्रा बहुत सफल रहने की उम्मीद है। सुविधाओं की कोई कमी नहीं होगी कोई बड़ी मुश्किल नहीं आएगी और डरने की कोई वजह नहीं होगी।

उन्होंने आगे कहा कि हम प्रार्थना करते हैं कि सभी की तीर्थयात्रा शुभ हो और रास्ते में किसी को भी किसी रुकावट, परेशानी या मुश्किल का सामना न करना पड़े।

छत्तीसगढ़ की साध्वी बृहस्पति गिरी ने बताया कि यह उनकी पहली अमरनाथ यात्रा है। उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा और उनके बुलावे से ही मैं यहाँ आ पाई हूँ। ब्रह्मचारी पार्थ देव ने बताया कि वे पूरे भारत की यात्रा कर रहे थे और उन्हें अमरनाथ यात्रा करने की आध्यात्मिक प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा कि जब भगवान शिव हमारे साथ हों तो किसी भी तरह का डर या चिंता नहीं रहती। संत और साधु-महात्मा डरकर नहीं जीते। साधु ने कहा कि वे सभी जीवों की भलाई के लिए प्रार्थना करते हैं और कामना करते हैं कि सब खुश, स्वस्थ और दुखों से मुक्त रहें। उन्होंने कहा कि उनकी प्रार्थना सभी लोगों, जानवरों और अन्य जीवों के लिए शांति, समृद्धि और सद्भाव की होती है। राम मंदिर में रुके लोगों में तमिलनाडु के भैरव भी शामिल हैं जिन्होंने इस तीर्थयात्रा को बहुत ज़्यादा खुशी देने वाला अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि सब कुछ बहुत बढ़िया, शानदार और खुशियों से भरा है। बाबा अमरनाथ के दर्शन का मौका मिलना सचमुच एक आनंदमयी अनुभव है। भैरव ने बताया कि वे अपनी तीर्थयात्रा कई महीने पहले ही शुरू कर देते हैं और जम्मू पहुँचने से पहले कई प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा करते हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ पहुँचने से पहले मैंने चार धाम की यात्रा पूरी की और काशी, अयोध्या, गंगा, शिव खोड़ी और वैष्णो देवी के दर्शन किए। यह मंदिर पारंपरिक रूप से अमरनाथ यात्रा से पहले देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले साधुओं के लिए एक अहम पड़ाव रहा है।

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