गौहाटी विश्वविद्यालय के ब्रह्मपुत्र अध्ययन केंद्र में ‘क्लियर' ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ
- DSS Admin
- Jun 25, 2026
गुवाहाटी, 25 जून (हि.स.)।
गौहाटी विश्वविद्यालय के ब्रह्मपुत्र अध्ययन केंद्र की पहल पर गुरुवार को ‘क्लियर’ (क्लाइमेट चेंज एजुकेशन फ़ॉर एक्शन एंड रेसिलिएन्स) नामक एक माह के ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं के बीच जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण, आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा सतत विकास के प्रति जागरूकता, ज्ञान और नेतृत्व क्षमता का विकास करना है।
ब्रह्मपुत्र अध्ययन केंद्र के निदेशक ध्रुवज्योति सहरिया के नेतृत्व में आयोजित उद्घाटन समारोह में पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के लगभग 250 विद्यार्थियों ने भाग लिया। पूर्णतः ऑनलाइन माध्यम से आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को जलवायु परिवर्तन और सतत विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यापक एवं बहुविषयक ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, नदी बेसिन प्रबंधन, पर्यावरणीय सततता, जलवायु एवं सामुदायिक लचीलापन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों के व्याख्यान, परिचर्चाएं और संवाद आयोजित किए जाएंगे। शिक्षा जगत, सरकारी संस्थाओं, आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों, पर्यावरण संगठनों, मीडिया तथा विकासात्मक संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ इसमें संसाधन व्यक्ति के रूप में भाग लेंगे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में व्यावहारिक गतिविधियों और क्षेत्र-आधारित असाइनमेंट को भी शामिल किया गया है, जिससे प्रतिभागियों को पर्यावरण और विकास से संबंधित वास्तविक चुनौतियों को समझने का अवसर प्राप्त होगा।
उद्घाटन अवसर पर अपने संदेश में प्रोफेसर ध्रुवज्योति सहरिया ने कहा कि, “जलवायु परिवर्तन अब केवल भविष्य की आशंका नहीं, बल्कि वर्तमान की कठोर वास्तविकता है। विशेष रूप से ब्रह्मपुत्र घाटी और पूर्वोत्तर क्षेत्र में इसके प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। क्लियर कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को ज्ञान, अनुभव और व्यावहारिक कौशल से समृद्ध कर समाज एवं पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।”
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बहुआयामी शिक्षण, अनुभवात्मक शिक्षा और कौशल विकास संबंधी उद्देश्यों के अनुरूप है।
एमओओसीआधारित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से पांच वर्षीय स्नातकोत्तर तथा चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।
उल्लेखनीय है कि उत्तर-पूर्वी परिषद के सहयोग से स्थापित ब्रह्मपुत्र अध्ययन केंद्र ब्रह्मपुत्र नदी घाटी को केंद्र में रखकर अनुसंधान, नीति-चर्चा और समाजोन्मुख गतिविधियों को आगे बढ़ा रहा है। केंद्र जलवायु लचीलापन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जैव विविधता संरक्षण, स्थानीय ज्ञान प्रणाली और सतत विकास जैसे विषयों पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की डॉ. भारती भराली, मानवशास्त्र विभाग के डॉ. नवजीत कुमार दास, भूगोल विभाग के डॉ. धनजीत दास तथा प्राणी विज्ञान विभाग के डॉ. कुलदीप शर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
‘क्लियर’ कार्यक्रम की शुरुआत को ब्रह्मपुत्र अध्ययन केंद्र की शिक्षा, अनुसंधान, नीति-संवाद और जन-जागरूकता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उम्मीद जताई गई है कि यह पहल भविष्य में पर्यावरण-सचेत, समाजोन्मुख और जिम्मेदार युवा नेतृत्व तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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