वेदों में जातिवाद का कोई स्थान नहीं-स्वामी राम स्वरूप जी

There is no place for the caste system in the Vedas – Swami Ram Swarup Ji.


कठुआ, 21 जून । वेद मन्दिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 71वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी योगाचार्य ने यजुर्वेद मंत्र 31/11 के माध्यम से बताया कि वेदों में वर्ण व्यवस्था कर्म के आधार पर है न कि जन्म के आधार पर। उन्होंने स्पष्ट किया कि जातिवाद जैसी कुरीति का वेदों में कहीं भी उल्लेख नहीं है।

स्वामी जी ने कहा कि सतयुग त्रेता और द्वापर युग में जब घर-घर वेद ज्ञान था तब समाज में प्रेम, समानता और सद्भाव का वातावरण था तथा लोग अपने-अपने कर्मों के अनुसार जीवन यापन करते थे। उस समय जातिवाद जैसी कोई अवधारणा अस्तित्व में नहीं थी। अपने प्रवचन में उन्होंने सत्यकाम जबाला, भीम-हिडिम्बा और द्रौपदी स्वयंवर के उदाहरण देकर समझाया कि प्राचीन काल में जाति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं था। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रचलित जातिवाद मनुष्यों द्वारा निर्मित एक वेद-विरुद्ध कुप्रथा है जिसे समाज से समाप्त किया जाना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने वेदों के सत्य संदेश को अपनाने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।

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