भूस्खलन की चुनौतियों से लड़कर टॉय ट्रेन ने रचा इतिहास, मई-जून में रिकॉर्ड तोड़ कमाई
- DSS Admin
- Jul 04, 2026
सिलीगुड़ी, 04 जुलाई (हि.स.)। प्राकृतिक आपदाओं और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (डीएचआर) की विश्व प्रसिद्ध टॉय ट्रेन ने एक बार फिर अपनी मजबूती और लोकप्रियता साबित कर दी है। लगातार भूस्खलन और लैंडस्लाइड जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करने के बावजूद टॉय ट्रेन ने मई और जून 2026 में रिकॉर्ड तोड़ आय अर्जित कर नया इतिहास रच दिया।
सुकना रेलवे स्टेशन पर शनिवार को आयोजित 145वें विश्व धरोहर ‘हेरिटेज टॉय ट्रेन डे’ समारोह के दौरान डीएचआर के निदेशक ऋषभ चौधरी ने बताया कि मई 2026 में टॉय ट्रेन ने लगभग 3 करोड़ 95 लाख रुपये की कमाई की थी, जबकि जून में यह आंकड़ा बढ़कर 3 करोड़ 98 लाख रुपये तक पहुंच गया। यह अब तक की सबसे अधिक मासिक आय में से एक है।
उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण टॉय ट्रेन के संचालन में अस्थायी बाधाएं जरूर आती हैं, लेकिन इसकी रफ्तार और लोकप्रियता पर कोई असर नहीं पड़ा है। समय-समय पर मरम्मत और ट्रैक बहाली के कारण सेवा को जल्द सामान्य कर दिया जाता है, जिससे पर्यटकों का भरोसा बना हुआ है।
डीएचआर निदेशक के अनुसार, देश और विदेश के पर्यटकों के बीच टॉय ट्रेन का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद इसकी आय में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि भूस्खलन की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नेशनल हाईवे एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) के साथ मिलकर काम करने की योजना बनाई जा रही है।
इसके अलावा, दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सहयोग से एक विस्तृत योजना तैयार की जा रही है, जिसके तहत पुराने रेलवे स्टेशनों और संरचनाओं का संरक्षण, पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि 4 जुलाई 1881 को दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की टॉय ट्रेन ने पहली बार सिलीगुड़ी से दार्जिलिंग तक सफर शुरू किया था। करीब डेढ़ सौ वर्षों से यह टॉय ट्रेन न केवल परिवहन का साधन है, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक भी बनी हुई है।

