धार्मिक तस्वीरों के अपमान पर कानून बनाने की मांग:संगरुर डीसी को दिया ज्ञापन, अखबारों में गुरुओं की तस्वीर छापने का विरोध

धार्मिक गुरुओं और महापुरुषों के सम्मान को बनाए रखने के लिए संगरूर में एक नई कानूनी पहल की मांग उठी है। शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत के नेतृत्व में सिख, हिंदू और मुस्लिम समुदायों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के नाम एक ज्ञापन जिला उपायुक्त (डीसी) को सौंपा। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि जिस प्रकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सम्मान के लिए बेअदबी कानून बनाया गया है, उसी तर्ज पर एक ऐसा कानून भी आवश्यक है जो अख़बारों और सार्वजनिक विज्ञापनों में छपने वाली धार्मिक गुरुओं की तस्वीरों के अनादर को रोक सके। अख़बारों और फ्लेक्स बोर्डों के इस्तेमाल पर आपत्ति ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि अक्सर अख़बारों और फ्लेक्स बोर्डों पर धार्मिक गुरुओं की तस्वीरें छापी जाती हैं। बाद में उन्हीं अख़बारों का इस्तेमाल सामान लपेटने, सफाई करने या अन्य कार्यों के लिए किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप ये तस्वीरें कूड़े के ढेर में मिलती हैं या लोगों के पैरों तले आती हैं, जिससे धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचती है। तस्वीरों के प्रकाशन पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग सर्वधर्म एकता का प्रतीक बना ज्ञापन यह ज्ञापन शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत के जिला अध्यक्ष रिपुदमन ढिल्लों के नेतृत्व में सौंपा गया। इस मौके पर उनके साथ सुल्तान खान और नरिंदर कुमार भी मौजूद रहे, जो इस बात का प्रतीक है कि यह मांग केवल एक समुदाय की नहीं बल्कि सभी धर्मों के साझा सम्मान से जुड़ी है। गुरुओं की गरिमा और 'चरण पादुका' का अनादर नेताओं का तर्क है कि जब इन तस्वीरों वाले कागज या फ्लेक्स जमीन पर फेंके जाते हैं, तो यह गुरुओं की गरिमा और उनकी चरण पादुकाओं के अनादर के समान है। इसे रोकने के लिए सरकार को तत्काल कड़े निर्देश जारी करने चाहिए। राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी संगठन ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया और कानून नहीं बनाया, तो आने वाले समय में पूरे पंजाब में इस मांग को लेकर बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि धार्मिक शांति बनाए रखने के लिए गुरुओं का सम्मान सर्वोपरि है।

   

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