प्रदेश सरकार अपनी जवाबदेही से बच रही, प्रसुताओं की मौत चिंताजनक : गहलोत
- DSS Admin
- Jun 23, 2026
जोधपुर, 23 जून (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोटा में प्रसूताओं की मौत और जोधपुर में बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को गंभीर बताते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया। गहलोत ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य, कानून व्यवस्था, पेयजल और अधूरे विकास कार्यों को लेकर सरकार जवाबदेही से बच रही है। वे मंगलवार को जोधपुर प्रवास पर सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने कोटा में प्रसूताओं की मौत और जोधपुर में प्रसूताओं की बिगड़ती तबीयत के मामलों को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि सरकार को पूरे मामले में गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए।
गहलोत ने कहा कि प्रदेशभर से लाखों महिलाएं सरकारी अस्पतालों में उपचार के लिए आती हैं और यदि इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं तो यह सीधे स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़ा करती हैं। उन्होंने कहा कि समय पर अधिकारियों की सक्रियता और मरीजों को एम्स रेफर करना अच्छी बात है, लेकिन ऐसी नौबत ही क्यों आए, यह बड़ा सवाल है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में कई स्वास्थ्य परियोजनाएं और भवन अधूरे पड़े हैं। सरकार नई घोषणाएं तो कर रही है, लेकिन पहले से तैयार ढांचे और संस्थानों का उपयोग नहीं कर पा रही। उन्होंने कहा कि पूर्व में शुरू किए गए कई सेंटर और भवन आज भी पूरी तरह संचालित नहीं हो सके हैं।
कोचिंग और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी गहलोत ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पहले बनाए गए बड़े संस्थागत ढांचे का सही उपयोग करने के बजाय सरकार दूसरी प्राथमिकताओं पर ध्यान दे रही है। उनके अनुसार, यदि समय पर योजनाओं को आगे बढ़ाया जाए तो जनता को सीधा लाभ मिल सकता है।
कानून व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। गहलोत ने कहा कि जोधपुर में हाल के घटनाक्रमों ने लोगों के बीच भय का माहौल पैदा किया है और इससे कानून व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार केवल बयान दे रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति सुधरती दिखाई नहीं दे रही।
गहलोत ने पत्रकार वार्ता में केंद्रीय मंत्री का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना का श्रेय कोई भी ले सकता है, लेकिन जरूरी यह है कि काम समय पर पूरा हो। उन्होंने पेयजल संकट का भी मुद्दा उठाते हुए कहा कि जनता परेशान है जबकि जिम्मेदार लोग मौन बने हुए हैं।
चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की संभावना पर पूछे गए सवाल पर गहलोत ने कहा कि इसका फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा। उन्होंने कहा कि राजनीति में सक्रिय रहना जरूरी है और नेता कभी रिटायर नहीं होते। उन्होंने अधिकारियों को भी संदेश देते हुए कहा कि केवल सेवा निवृत्ति तक सीमित न रहें, बल्कि लंबे समय तक समाज और जनता के लिए काम करने का प्रयास करें ताकि लोग उन्हें याद रखें।

