पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने पेट्रोल-डीजल महंगाई और नीट पेपर लीक पर उठाए गंभीर सवाल
- DSS Admin
- May 15, 2026
जयपुर, 15 मई (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों, बढ़ती महंगाई और लगातार हो रहे नीट परीक्षा पेपर लीक मामलों पर तीखा प्रहार किया। गहलोत ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को गरीब और मध्यम वर्ग पर सीधा बोझ बताते हुए केंद्र की नीतियों को जनविरोधी करार दिया।
पेट्रोल-डीजल कीमतों पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी ने पहले ही चेतावनी दी थी कि चुनाव समाप्त होते ही ईंधन की कीमतें बढ़ेंगी, और वही हुआ। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस शासनकाल में कच्चे तेल की कीमतें 115 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची थीं, तब भी जनता पर इतना भार नहीं डाला गया था। इसके विपरीत, मोदी सरकार को लंबे समय तक सस्ते क्रूड ऑयल का लाभ मिलने के बावजूद जनता को राहत नहीं दी गई।
गहलोत ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी संरचना में बदलाव कर राज्यों के हिस्से को सीमित किया और अतिरिक्त व विशेष एक्साइज ड्यूटी लगाकर राजस्व का बड़ा हिस्सा अपने पास रखा। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती तो तेल कीमतों में राहत देकर जनता को लाभ पहुंचा सकती थी, लेकिन उसकी सोच गरीब और मध्यम वर्ग विरोधी रही है।
नीट परीक्षा में लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों पर गहलोत ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2024, 2025 और अब 2026 तक लगातार पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे करोड़ों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने मांग की कि इन सभी मामलों की व्यापक जांच सीबीआई से कराई जाए और यदि एजेंसी निष्पक्ष परीक्षा आयोजित नहीं कर पा रही है, तो एनटीए को भंग कर परीक्षा संचालन का अधिकार पुनः राज्यों को सौंपा जाना चाहिए।
गहलोत ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार सुशासन की बजाय धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति में अधिक रुचि रखती है।
उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर गंभीरता से काम करने के बजाय सरकार धर्म आधारित राजनीति कर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रही है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा नीट परीक्षा ऑनलाइन करवाने संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने फिलहाल कोई स्पष्ट टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि समय बताएगा कि यह विचार व्यवहारिक रूप से कितना सफल हो पाएगा।
---------------

