आरपार : पीओके में छात्रों की बगावत से बौखलाया पाकिस्तान!
- Sanjay Kulshrestha
- Jul 14, 2026
इस्लामाबाद
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हालात काफी बिगड़ चुके हैं। पिछले कई दिनों से पीओके में भारी प्रदर्शन किए जा रहे हैं। प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाली जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) पार्टी ने 48 घंटे में मांगे पूरी नहीं होने पर 15 जुलाई को पाकिस्तानी असेंबली से आजाद होने की घोषणा की है। दरअसल छ्व्र्रष्ट ने 15 जुलाई को को मुजफ्फराबाद की तरफ मार्च करने का ऐलान किया है जो कथित तौर पर पीओके की राजधानी है। इस मार्च में शामिल होने के लिए भारी संख्या में बच्चे पहुंच रहे हैं इसीलिए शहबाज शरीफ की सरकार डर गई है।
पाकिस्तानी शासकों ने दशकों से कश्मीर को लेकर भारत को परेशान किया लेकिन अब उसके कब्जे वाले कश्मीर में ही बगावत शुरू हो गई है। पाकिस्तानी अखबार ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक पीओके की सरकार ने रविवार को चेतावनी दी है कि प्रतिबंधित जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी को अपने विरोध प्रदर्शनों के दौरान छात्रों से जुड़ी किसी भी अप्रिय घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। बहुत आशंका है कि पाकिस्तानी सेना प्रदर्शनकारियों को गोली मारने वाली है लेकिन अगर रैली में बच्चे शामिल होते हैं तो उसके लिए क्रूरता करना आसान नहीं होगा। पीओके की पाकिस्तान की कठपुतली सरकार के प्रवक्ता चौधरी गुफ्तार हुसैन और पुलिस के प्रवक्ता डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (ष्ठढ्ढत्र) इरफान मसूद काशफी ने कहा कि प्रतिबंधित समूह ने छात्रों से 14 और 15 जुलाई को प्रदर्शनों में भाग लेने का आह्वान किया है और 15 जुलाई को मुजफ्फराराबाद तक छात्रों के मार्च की योजना बनाई थी। उन्होंने कहा कि 4 अक्टूबर 2025 के समझौते के तहत अब प्रतिबंधित छ्व्र्रष्ट की सभी 38 मांगें मान ली गई थीं। लेकिन बाद में समिति मौलिक अधिकारों से संबंधित मांगों से हट गई और सरकार-विरोधी उद्देश्यों को आगे बढ़ाया जिसके कारण कानून के तहत उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि 36 दिनों के धरने ने पुंछ डिवीजन में भोजन, दवाओं और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को बुरी तरह बाधित कर दिया था। उन्होंने कहा कि राजमार्गों और संपर्क सडक़ों पर नाकेबंदी ने लोगों की आवाजाही को ठप कर दिया और कई क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की कमी पैदा कर दी। सरकार के प्रवक्ता ने प्रतिबंधित छ्व्र्रष्ट पर महिलाओं और बच्चों को कानून प्रवर्तन कर्मियों के सामने रखकर 'मानव ढाल' के रूप में इस्तेमाल करने उन्हें उनकी इच्छा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल करने और कुरान की प्रतियां और सफेद झंडे लेकर आगे भेजने की योजना बनाने का आरोप लगाया।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थिति काफी तनावपूर्ण और नाजुक है। स्थानीय प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तान सरकार के बीच गतिरोध पर चरम पर पहुंच चुका है। आंदोलन की अगुवाई कर रही छ्व्र्रष्ट पार्टी ने 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद की तरफ मार्च करने और मांगे नहीं मानने पर पाकिस्तान की असेंबली से आजादी का ऐलान करने की धमकी दी है। पाकिस्तानी सेना प्रदर्शन को कुचलने के लिए आंदोलन के केन्द्र रावलकोट में करीब साढ़े 17 हजार जवानों को भेज चुकी है। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पीओके की स्थानीय कश्मीरी पुलिस ने पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स का साथ देने से इनकार कर दिया है।
उन्होंने अपने ही लोगों पर गोली चलाने या पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के लिए मानव ढाल बनने से साफ मना कर दिया है। पाकिस्तानी प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में इंटरनेट, संचार सेवाएं और बिजली ठप कर दी है। इसके अलावा भोजन, ईंधन और जीवन रक्षक दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति रोककर आर्थिक नाकाबंदी कर दी गई है। आपको बता दें यह आंदोलन शुरुआत में बिजली की बढ़ती कीमतों, आटे पर सब्सिडी की बहाली, बुनियादी मानवाधिकारों और अनुचित टैक्स के खिलाफ शुरू हुआ था। लेकिन जून 2026 में सुरक्षा बलों की तरफ से की गई अंधाधुंध गोलीबारी के बाद स्थिति बिगड़ गई। 30 से ज्यादा नागरिकों की मौत के बाद यह आंदोलन पूरी तरह से पाकिस्तानी सेना के खिलाफ और पूर्ण स्वतंत्रता की मांग में तब्दील हो चुका है।

