गुवाहाटी, 03 जुलाई (हि.स.)। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में स्वास्थ्य क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से किए गए सुनियोजित सुधारों और निरंतर निवेश के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। केंद्र सरकार के नवीनतम् आंकड़ों के अनुसार, असम की शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) वर्ष 2018 के 41 से घटकर वर्ष 2024 में 29 हो गई है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि जुलाई 2017 में स्वास्थ्य मंत्री के रूप में उन्होंने बरपेटा मेडिकल कॉलेज में नवजात शिशुओं के लिए सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) की शुरुआत की थी। उस समय उन्हें विश्वास था कि यह पहल राज्य में शिशु मृत्यु दर कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जो अब वास्तविकता में बदल चुकी है।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षित नर्सों, आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य अधिकारियों की समर्पित सेवाओं, चाय बागान क्षेत्रों में स्वास्थ्य अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण, चिकित्सकों एवं एम्बुलेंस सेवाओं के विस्तार तथा संस्थागत प्रसव में वृद्धि जैसे अनेक कदमों ने मिलकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार किया है।
सरमा ने कहा कि बाल विवाह और कम उम्र में गर्भधारण भी मातृ एवं शिशु मृत्यु के प्रमुख कारण रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने बाल विवाह रोकने के उद्देश्य से कानून लागू किया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप न केवल शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमी आई है, बल्कि किशोरावस्था में गर्भधारण के मामलों में भी गिरावट दर्ज की गई है तथा सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा मिला है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस उपलब्धि पर रुकने वाली नहीं है। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में शिशु मृत्यु दर को और कम करने तथा प्रत्येक मां और नवजात को बेहतर एवं सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।
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