बिहार कैबिनेट की बैठक में 13 प्रस्तावों को मंजूरी, चिकित्सा सहायता राशि बढ़ी, औद्योगिक-कृषि परियोजनाओं को प्रोत्साहन

पटना, 03 जून (हि.स.)। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार शाम आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 13 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। मुख्य सचिवालय स्थित कैबिनेट हॉल में हुई इस बैठक में स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, उद्योग, कृषि, कौशल विकास तथा ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए।

बैठक में बिहार बाल विकास सेवा संवर्ग को मजबूत बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। इसके तहत संवर्ग में स्वीकृत 544 पदों में से 136 पद अधीनस्थ सेवा में कार्यरत महिला पर्यवेक्षिकाओं से वरीयता एवं योग्यता के आधार पर भरे जाएंगे। इसके लिए बिहार बाल विकास सेवा भर्ती एवं सेवा शर्त संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी प्रदान की गई। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से विभागीय कार्यों में अनुभव रखने वाली महिला कर्मियों को पदोन्नति का अवसर मिलेगा और सेवा व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लेते हुए मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष से मिलने वाली आर्थिक सहायता की अधिकतम सीमा ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर चार लाख रुपये कर दी है। इस निर्णय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

मत्स्य क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए भोजपुर जिले के बाणासुर मत्स्य बीज उत्पादन प्रक्षेत्र में इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क की स्थापना को मंजूरी दी गई। इस परियोजना के लिए 31 करोड़ 30 लाख 92 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। सरकार का मानना है कि इससे मत्स्य उत्पादन बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मधुबनी जिले में अनाज भंडारण निर्माण इकाई की स्थापना के लिए 83 करोड़ 25 लाख रुपये के निवेश प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। इस परियोजना के शुरू होने से लगभग 109 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में केंद्र प्रायोजित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के क्रियान्वयन के लिए 164 करोड़ 51 लाख 60 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। इस योजना का उद्देश्य छोटे खाद्य उद्यमों को तकनीकी एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें प्रतिस्पर्धी बनाना है।

कौशल विकास के क्षेत्र में औरंगाबाद जिले के नवीनगर में नए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) की स्थापना को मंजूरी दी गई। इसके लिए 38 पदों के सृजन तथा प्रतिवर्ष 2 करोड़ 11 लाख 89 हजार रुपये के व्यय की स्वीकृति प्रदान की गई है। सरकार ने निर्णय लिया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 से यहां पांच विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।

दरभंगा एम्स परियोजना को लेकर भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया। चयनित भूमि पर मिट्टी भराई और समतलीकरण कार्य के लिए निकटवर्ती नदियों की उड़ाही से निकाली गई गाद का उपयोग किया जाएगा। इस कार्य के निष्पादन के लिए जल संसाधन विभाग को अधिकृत किया गया है। पूर्व से स्वीकृत योजना के अंतर्गत विभाग को आवश्यक राशि प्राक्कलन के अनुसार उपलब्ध कराई जाएगी।

पशुपालन एवं डेयरी विकास के क्षेत्र में कैमूर जिले में सात एकड़ भूमि पर डेयरी परियोजना स्थापित करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए संबंधित भूमि को डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग को हस्तांतरित करने की मंजूरी दी गई है। इससे दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और स्थानीय किसानों को लाभ पहुंचाने की उम्मीद है।

ऊर्जा क्षेत्र में उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए बिजली कंपनियों में द्विस्तरीय उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम के गठन को मंजूरी दी गई। इसके लिए दो अभियंता और दो विद्युत अधीक्षण अभियंता के पद सृजित किए गए हैं। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान अधिक प्रभावी और समयबद्ध तरीके से हो सकेगा।----------

   

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