भारत की आत्मा है संविधान की प्रस्तावना : प्रो. हरिकेश सिंह
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- Mar 22, 2025

बलिया, 22 मार्च (हि.स.)। सतीश चंद्र कॉलेज में राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा भारत के संविधान की उद्देशिका विषयक विश्वविद्यालय स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन शनिवार को किया गया। मुख्य अतिथि जयप्रकाश विश्वविद्यालय छपरा के पूर्व कुलपति प्रोफेसर हरिकेश सिंह ने भारत के संविधान के प्रस्तावना को भारत की आत्मा के रूप में स्वीकार किया।
उन्होंने कहा कि अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को ध्यान में रखकर भारतीय संविधान की संरचना की गई।
हरिकेश सिंह ने भारत के संविधान की विभिन्न रूपों की लोकतांत्रिक समाज में लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना में उसके आदर्श स्वरूपों की परिचर्चा की।
विशिष्ट अतिथि सैन्य विज्ञान के आचार्य और हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर लल्लन सिंह ने संविधान के 42वें संविधान संशोधन पर पुनर्विचार करने के लिए भारतीय संसद और सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया। कहा कि लोकतांत्रिक समाज की संरचना में भारत के संविधान की आत्मा में संशोधन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों का आवाहन किया कि वह पढ़ें। कहा कि अच्छी पुस्तकों से अच्छे संस्थानों से विद्यार्थी आगे बढ़ सकते हैं।
कुंवर सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार सिंह ने संविधान बनने के पूर्व ब्रिटिश हुकूमत में भारतीय जनता के शोषण से अपनी बात शुरू की। उन्होंने इंग्लैंड, अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस आदि देशों के संवैधानिक लोकतांत्रिक व्यवस्था का उदाहरण दिया। देश में आजादी के संघर्ष के बाद बन रहे संविधान की उद्देशिका की परिचर्चा का भी उल्लेख किया। कहा कि भारत के संविधान की मूल आत्मा इस उद्देशिका में रहती है।
विषय प्रवर्तन राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सानंद सिंह ने किया। उन्हाेंने बलिया की राजनीतिक, आध्यात्मिक और साहित्यिक मेधा से सभी का परिचय कराया। कहा कि यहां का राजनीति विज्ञान विभाग सदैव से देश की राजनीति के लिए मार्गदर्शन के रूप में रहा है। यहां के विद्यार्थियों ने मतदाता से लेकर नेता तक सकारात्मक वातावरण दिया है।
प्रो. संजय ठाकुर, प्रो. अवनीश चंद्र पांडेय, डा. राजेश कुमार, प्रो. श्रीपति यादव आदि ने अपना भारत के संविधान उसके मूल्यपरक उद्देश्य, नागरिकों के अधिकार, स्वतंत्रता, समानता व मूल अधिकार आदि विभिन्न विषयों समेत सर्वोच्च न्यायालय व भारत की न्याय प्रक्रिया आदि पर विचार विमर्श किया। कई विद्यार्थियों ने अपनी बात रखी। सैकड़ों विद्यार्थियों ने चार्ट द्वारा भारतीय संविधान की रूपरेखा प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में प्रो. अवनीश चंद्र पांडेय, भारतेंदु मिश्र, ओंकार सिंह, डॉ. संजय कुमार ठाकुर व ज्ञानेंद्र सिंह आदि ने भाग लिया। प्रोफेसर श्रीपति ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। संचालन डा. राजेश कुमार व अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. बैकुंठ नाथ पांडेय ने किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / नीतू तिवारी