इथेनॉल ब्लेंडेड ईंधन नीति के खिलाफ पश्चिम बंगाल आइएनटीयूसी सेवा दल का कोलकाता में प्रदर्शन
- DSS Admin
- Jul 06, 2026
पश्चिम बर्दवान, 06 जुलाई (हि. स.)। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सोमवार को पश्चिम बंगाल आइएनटीयूसी सेवा दल ने कोलकाता के बेंटिंक स्ट्रीट स्थित आलिया होटल के सामने से विक्टोरिया हाउस के पास स्थित एक पेट्रोल पंप तक विरोध मार्च निकाला। केंद्र सरकार की इथेनॉल आधारित ईंधन नीति के विरोध में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में संगठन के नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।
मार्च में पश्चिम बंगाल आइएनटीयूसी सेवा दल के अध्यक्ष प्रमोद पांडे और उपाध्यक्ष शंकर नाथ हाजरा भी मौजूद रहे।
प्रदर्शन के दौरान संगठन ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार पर्याप्त वैज्ञानिक परीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन के बिना E20, E80 और E100 इथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा दे रही है।
संगठन का कहना है कि देश में चल रहे अधिकांश पेट्रोल वाहन इस तरह के उच्च इथेनॉल मिश्रित ईंधन के अनुकूल नहीं हैं। इससे वाहन मालिकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है और परिवहन व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए गन्ने की खेती पर निर्भरता बढ़ेगी, जिससे जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। उनका कहना है कि इससे कृषि क्षेत्र में जल संकट गहरा सकता है और पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
संगठन के नेताओं ने कहा कि दुनिया के कई देशों में इथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग एक निर्धारित सीमा तक ही किया जाता है। उनका आरोप है कि भारत में पर्याप्त तकनीकी तैयारी और अंतरराष्ट्रीय अनुभव का आकलन किए बिना सौ प्रतिशत इथेनॉल आधारित वाहनों को बढ़ावा देना आम लोगों, किसानों और ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। मौके पर पश्चिम बंगाल आइएनटीयूसी सेवा दल अध्यक्ष प्रमोद पांडे, उपाध्यक्ष शंकर नाथ हाजरा आदि उपस्थित थे।
पश्चिम बंगाल आइएनटीयूसी सेवा दल के अध्यक्ष प्रमोद पांडे ने कहा कि केंद्र सरकार की इस नीति से पर्यावरण, जल संसाधनों और देश की परिवहन व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने मांग की कि किसी भी नीति को लागू करने से पहले वैज्ञानिक मूल्यांकन, विशेषज्ञों की राय और पर्याप्त तकनीकी तैयारी सुनिश्चित की जाए।
संगठन के उपाध्यक्ष शंकर नाथ हाजरा ने कहा कि देश के करोड़ों पेट्रोल वाहन मालिकों के हितों को ध्यान में रखे बिना इथेनॉल नीति लागू करना आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की।
प्रदर्शन के अंत में कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से इथेनॉल आधारित ईंधन नीति की समीक्षा करने की मांग की। साथ ही पर्यावरण, किसानों और आम वाहन चालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक शोध और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर निर्णय लेने की अपील की।
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