पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी को मजबूती: चालसा–चेंगराबांधा सड़क बनेगी चार लेन

जलपाईगुड़ी, 03 जुलाई (हि.स.)। चालसा से चेंगराबांधा तक सड़क को चार लेन में विस्तारित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसी उद्देश्य से नेशनल हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) ने नए सिरे से विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की पहल की है। हाल ही में राष्ट्रीय राजमार्ग एवं एशियन हाईवे प्राधिकरण से इस सड़क की जिम्मेदारी हस्तांतरित होने के बाद पूरे रूट पर सर्वे की तैयारी शुरू कर दी गई है।

सूत्रों के अनुसार, मयनागुड़ी शहर के भीतर से सड़क ले जाने के बजाय दुर्गाबाड़ी होते हुए सीधे चेंगराबांधा तक सड़क का विस्तार किया जा सकता है। इससे एक ओर मयनागुड़ी के पुराने बाजार क्षेत्र के व्यापारियों को राहत मिली है। वहीं दूसरी ओर संभावित भूमि अधिग्रहण की आशंका से दुर्गाबाड़ी से चेंगराबांधा मार्ग के किनारे रहने वाले लोगों और व्यापारियों की चिंता बढ़ने लगी है।

एनएचआईडीसीएल के जनरल मैनेजर राहुल गुप्ता ने बताया, “पहले राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से इस सड़क को चौड़ा करने के लिए क्या प्रस्ताव था, उसे देखा जा रहा है। पूरे मामले का नए सिरे से सर्वे किया जाएगा और इसके लिए डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।”

उल्लेखनीय है कि उदलाबाड़ी से चालसा गोलाई होते हुए मयनागुड़ी बीडीओ ऑफिस मोड़ तक 717 नंबर राष्ट्रीय राजमार्ग फैला हुआ है। वहीं, मयनागुड़ी के इंदिरा मोड़ से चेंगराबांधा तक लगभग 16 किलोमीटर का हिस्सा एशियन हाईवे के अंतर्गत था। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद इन दोनों सड़कों को एनएचआईडीसीएल को सौंप दिया गया है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, उत्तर-पूर्व भारत से संपर्क बनाए रखने से लेकर चेंगराबांधा सीमा के माध्यम से बांग्लादेश के साथ व्यापारिक संपर्क तक, इस सड़क का विशेष महत्व है। सिलीगुड़ी से सेवक होते हुए आवागमन के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। जलपाईगुड़ी होते हुए डुआर्स जाने वाले मार्ग पर प्रतिदिन मालवाहक ट्रक, बस और छोटी गाड़ियों का आवागमन होता है। हालांकि, गोरुमारा और लाटागुड़ी के संरक्षित जंगलों में बड़ी संख्या में पेड़ काटकर चार लेन हाईवे बनाने की आवश्यकता पर बार-बार सवाल उठ रहे हैं।

पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि इस मार्ग पर यातायात का दबाव इतना अधिक नहीं है कि पूरे रास्ते को चार लेन करना जरूरी हो। सूत्रों के मुताबिक, एनएचआईडीसीएल ने अभी तक जंगल से सटे इलाकों में सड़क चौड़ीकरण की अंतिम रूपरेखा तय नहीं की है।जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में लाटागुड़ी और मौलानी में रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण भी इस सड़क विस्तार की पूर्व तैयारी का हिस्सा है। लाटागुड़ी में डबल लेन और मौलानी में पहले ही चार लेन बनाया जा चुका है, जो भविष्य की सड़क संरचना को ध्यान में रखकर ही तैयार किया गया है। इससे बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की आशंका बनी हुई है।

   

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