अरुणाचल प्रदेश इनर लाइन परमिट के दिशा-निर्देश 2026 में सुधार का आह्वान

इटानगर, 12 मई (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश जनजातीय बचाव आंदोलन समिति ने मंगलवार को अरुणाचल प्रदेश सरकार, विशेषकर राजनीतिक विभाग को, विभाग द्वारा जारी हालिया राजपत्र अधिसूचना अरुणाचल प्रदेश इनर लाइन परमिट दिशा-निर्देश 2026 में सुधार करने के लिए दो दिन का समय दिया है।

अरुणाचल प्रेस क्लब में मीडिया को संबोधित करते हुए समिति के महासचिव मिलो अम्बो ने आरोप लगाया कि हाल ही में 31 मार्च, 2026 को राजनीतिक विभाग ने अरुणाचल प्रदेश इनर लाइन परमिट दिशा-निर्देश, 2026 को आधिकारिक राजपत्रित अधिसूचना के रूप में जारी किया है।

जब हमने इसका अध्ययन किया, तो हमें इसमें कई खामियां मिलीं। यह जल्दबाजी में तैयार किया गया है और निकट भविष्य में अरुणाचल प्रदेश के नागरिकों के लिए बेहद खतरनाक है।

ऐसा प्रतीत होता है कि नए दिशा-निर्देश राज्य में गैर-निवासियों के प्रवेश के लिए इनर लाइन परमिट (आईएलपी) प्रणाली के प्रवर्तन और विनियमन को आसान करने के लिए है। इसमें यह भी उल्लेख है कि एक ठेकेदार अपने प्रोजेक्ट के लिए 200 मजदूरों को ला सकते है। हमने यह भी पाया है कि नए दिशा-निर्देश बंगाल पूर्वी सीमांत विनियमन अधिनियम 1873 का उल्लंघन करते हैं।

उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार से अधिसूचना में संशोधन करने का आग्रह किया। अन्यथा इससे निकट भविष्य में समस्याएं उत्पन्न होने की आशंका जताई।

बिना वैध प्रवेश (आईएलपी) या फर्जी आईएलपी के साथ बाहरी लोगों के अवैध प्रवेश के खिलाफ अपने आंदोलन को उजागर करते हुए, आंदोलन समिति के अध्यक्ष सोल डोडुम का दावा है कि यह जिला प्रशासन और विशेष रूप से चेक गेट पर तैनात पुलिसकर्मियों के भ्रष्टाचार के कारण हुआ है।

पुलिसकर्मी रिश्वत लेकर बिना आईएलपी के बाहरी लोगों को प्रवेश दे रहे हैं, जबकि जिला प्रशासन इस पर ठीक से निगरानी नहीं रख रहा है।

उन्होंने दावा किया कि आईएलपी जांच में भ्रष्टाचार के कारण सरकारी रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ी हो रही है, क्योंकि आईएलपी से प्राप्त राशि सरकारी खाते में ठीक से जमा नहीं हो रही है।

उन्होंने राज्य सरकार को अधिसूचना में सुधार के लिए दो दिन का समय दिया है और कहा है कि अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो वे राज्य सरकार के खिलाफ लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेंगे।

   

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