पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान की पत्नी लुईस को न्यायालय से मिली बड़ी राहत,वापस किया गैर जमानती वारंट

फर्रुखाबाद ,23 जून (हि.स.)। दिव्यांग उपकरण वितरण में कथित गबन से जुड़े बहुचर्चित मामले में पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद को मंगलवार को बड़ी राहत मिली। एमपी-एमएलए कोर्ट के प्रभारी एवं अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी हिमांशु नौटियाल ने उनके खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) को वापस लेने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 5 जुलाई को निर्धारित की गई है।

यह प्रकरण दिव्यांगों को उपकरण वितरण के लिए आयोजित शिविरों में कथित वित्तीय अनियमितताओं और धन के गबन से जुड़ा है। मामले में आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू), लखनऊ के तत्कालीन निरीक्षक रामशंकर यादव द्वारा 10 जून 2017 को कायमगंज कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। प्रारंभिक रिपोर्ट में डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट के प्रतिनिधि प्रत्यूष शुक्ला को नामजद किया गया था।

जांच आगे बढ़ने पर ट्रस्ट के सचिव अतहर फारूकी तथा परियोजना निदेशक लुईस खुर्शीद का नाम भी सामने आया। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद से मामला न्यायालय में विचाराधीन है। सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहने पर अदालत ने लुईस खुर्शीद के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था।

सोमवार को लुईस खुर्शीद स्वयं न्यायालय में उपस्थित हुईं। उनके अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार चौहान ने अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल कर गैर जमानती वारंट निरस्त करने की मांग की। उन्होंने अदालत को बताया कि उनकी मुवक्किल ने जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग किया है और उन्हें 16 दिसंबर 2019 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से अंतरिम अग्रिम जमानत भी प्राप्त हो चुकी है।

बचाव पक्ष की ओर से यह भी दलील दी गई कि आरोपी को बरी किए जाने संबंधी आवेदन खारिज होने के बाद दाखिल पुनरीक्षण याचिका उच्च न्यायालय में लंबित थी। डिवीजन कोर्ट से प्रकरण की फाइल ट्रायल कोर्ट में वापस भेजे जाने की सूचना समय पर न मिलने के कारण वह एक निर्धारित तारीख पर उपस्थित नहीं हो सकीं, जिसके चलते गैर जमानती वारंट जारी हो गया था।

दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने वारंट वापस लेने का आदेश पारित कर दिया। इस दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष शकुंतला देवी, नगर अध्यक्ष एवं अधिवक्ता अंकुर मिश्रा समेत कई कांग्रेस कार्यकर्ता और समर्थक न्यायालय परिसर में मौजूद रहे।

   

सम्बंधित खबर