निरंतर सीखने और अनुभव साझा करने से संस्थागत कार्य संस्कृति होती है मजबूत : मणीन्द्र अग्रवाल
- DSS Admin
- May 18, 2026
आईआईटी कानपुर में तीन दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित
कानपुर, 18 मई (हि.स.)। क्षमता निर्माण कार्यक्रम कर्मचारियों की कार्य दक्षता और व्यावसायिक प्रदर्शन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। निरंतर सीखने और अनुभव साझा करने से संस्थागत कार्य संस्कृति मजबूत होती है। यह बातें सोमवार आईआईटी कानपुर के निदेशक मणीन्द्र अग्रवाल ने कही।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में प्रशासनिक एवं वित्तीय कर्मियों के लिए साेमवार काे तीन दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन स्टाफ ट्रेनिंग यूनिट के तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में आईआईटी, आईआईएम, आईआईएसईआर, एनआईटी, केंद्रीय विश्वविद्यालयों, डीआईएटी, एनएफएसयू, आईसीएआर सहित देशभर के विभिन्न प्रमुख संस्थानों से 76 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन निदेशक मणीन्द्र अग्रवाल ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कार्य दक्षता, पेशेवर क्षमता और निरंतर सीखने के महत्व पर जोर दिया। इस दौरान उपनिदेशक ब्रज भूषण ने संसाधन व्यक्तियों को सम्मानित करते हुए उच्च शिक्षा संस्थानों में सहयोग और प्रशिक्षण की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम का संचालन कुलसचिव विश्व रंजन के मार्गदर्शन में किया गया। प्रशिक्षण सत्रों में विभिन्न संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने अपने व्यावहारिक अनुभव और प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यों से जुड़ी जानकारी प्रतिभागियों के साथ साझा की। आईआईटी कानपुर के आंतरिक प्रतिभागियों ने भी प्रशिक्षण में सक्रिय सहभागिता की।
प्रतिभागियों ने संवादात्मक सत्रों, विषयों की उपयोगिता और विभिन्न संस्थानों के बीच अनुभव साझा करने एवं नेटवर्किंग के अवसरों की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान उपलब्ध कराई गई आवास, भोजन, समन्वय और अन्य व्यवस्थाओं को भी प्रतिभागियों ने सराहा। आईआईटी कानपुर की कर्मचारी प्रशिक्षण इकाई ने सीमित संसाधनों के बावजूद कार्यक्रम का सफल संचालन किया।
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष भी यूनिट की ओर से इसी प्रकार की तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई थी, जिसे प्रतिभागियों ने काफी सराहा था। संस्थान की ओर से बताया गया कि भविष्य में भी ऐसे क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि कर्मचारियों के कौशल विकास और संस्थागत कार्य संस्कृति को और मजबूत किया जा सके।
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