मछलियों के संरक्षण के लिए ‘नो फिशिंग जोन’ के नियमों का पालन करें : डॉ. जितेंद्र कुमार

कानपुर, 05 जून (हि.स.)। मछलियों के प्रजनन काल में उनके संरक्षण और संवर्धन के लिए सभी का सहयोग आवश्यक है। प्रतिबंध अवधि के दौरान नदियों और बहती जलधाराओं में मत्स्य आखेट नहीं किया जाए तथा निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। जनसहभागिता से ही जल संसाधनों और मत्स्य संपदा का प्रभावी संरक्षण संभव है। यह बातें शुक्रवार को सहायक निदेशक मत्स्य कानपुर नगर डॉ. जितेंद्र कुमार ने कहीं।

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने जनपद की सभी नदियों एवं बहती जलधाराओं को एक जून से 31 अगस्त तक ‘नो फिशिंग जोन’ घोषित किया है। जारी आदेश के अनुसार इस अवधि में किसी भी नदी अथवा बहती जलधारा में मछली पकड़ने और बाड़े (घेराबंदी) लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय मछलियों के प्रजनन काल को सुरक्षित रखने तथा प्राकृतिक मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के उद्देश्य से लिया गया है। प्रजनन अवधि में मछलियों का आखेट रोकने से उनकी संख्या में वृद्धि होती है और जलाशयों की जैव विविधता भी संरक्षित रहती है।

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए मत्स्य विभाग को सतत निगरानी रखने और आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।

सहायक निदेशक मत्स्य डॉ. जितेंद्र कुमार ने मत्स्यजीवी सहकारी समितियों के सदस्यों तथा आम नागरिकों से अपील की है कि वे मत्स्य संरक्षण अभियान में सहयोग करें और प्रतिबंध अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की अवैध मत्स्य आखेट गतिविधि से दूर रहें। उन्होंने कहा कि जल संसाधनों और मत्स्य संपदा के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए यह कदम महत्वपूर्ण है।

   

सम्बंधित खबर