मासूंदा झील की सफाई हेतू टीएमसी के तैरते पौधों के आइलैंड

मुंबई ,21 मई (हि. स.) । 22 मई को विश्व जैव विविधता दिवस (वर्ल्ड बायोडायवर्सिटी डे) के मौके पर, ठाणे शहर की ऐतिहासिक रमणीय मासूंदा (तलाव पाली) झील को फिर से जीवंत करने के लिए ठाणे महानगर पालिका, सोसाइटी जनरल और ‘भागीरथ संस्था’ की इको-फ्रेंडली पहल खास तौर पर ध्यान खींच रही है। यह पहल मनपा आयुक्त सौरभ राव के निर्देशन में शुरू की गई है और यह पहल झील में बायोडायवर्सिटी को बचाने और पानी के सोर्स को बचाने में बहुत मदद करेगी।

अभी, शहरी और सेमी-अर्बन इलाकों में पानी के सोर्स घरेलू कचरे, सीवेज, न्यूट्रिएंट्स की ओवरलोडिंग और ऑर्गेनिक पॉल्यूटेंट्स की वजह से बड़े पैमाने पर प्रदूषित हो रहे हैं। इस बारे में, चीफ एनवायरनमेंट ऑफिसर मनीषा प्रधान ने कहा कि ‘फाइटोरेमेडिएशन’ यानी पौधों की मदद से पानी को साफ करने का तरीका, गंदे पानी के सोर्स को फिर से ज़िंदा करने का एक असरदार, टिकाऊ और सस्ता तरीका बन रहा है।

ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के पानी के सोर्स को फिर से ज़िंदा करने के कैंपेन में मदद करने के लिए, सोसाइटी जनरल और उसके पार्टनर एनजीओ ‘भागीरथ’ के सीएसआर फंड से मसुंडा झील में ‘फ्लोटिंग वेटलैंड्स’ यानी तैरते हुए पौधों के आइलैंड बनाए गए हैं। इसके लिए कैना इंडिका पौधों का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही, झील में पानी की क्वालिटी सुधारने के लिए कैस्केड एरेटर और सबमर्सिबल मिक्सर लगाए गए हैं।

इस पूरी कोशिश को ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के एनवायरनमेंट डिपार्टमेंट से कीमती गाइडेंस और सपोर्ट मिला है। माना जा रहा है कि यह नया इको-फ्रेंडली तरीका मसुंडा झील की पानी की क्वालिटी सुधारने, झील को सुंदर बनाने और इसकी बायोडायवर्सिटी को बचाने में बहुत मदद करेगा।

वर्ल्ड बायोडायवर्सिटी डे के मौके पर शुरू की गई इस कोशिश को एनवायरनमेंट बचाने, पानी के सोर्स की सुरक्षा और टिकाऊ डेवलपमेंट के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

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