गिरफ्तारी की आशंका में कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचे पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन, अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल

कोलकाता, 12 जून (हि. स.)। पश्चिम बंगाल सरकार के पूर्व मंत्री और प्रख्यात संगीतकार इंद्रनील सेन ने गिरफ्तारी की आशंका के बीच कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपनी पत्नी मधुच्छंदा सेन के साथ अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है

मामला बउबाजार थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 102 के तहत दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। इसी प्राथमिकी के आधार पर संभावित गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए दोनों ने उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत की मांग की है।आरोप है कि इंद्रनील सेन और उनकी पत्नी ने दुर्गापूजा से जुड़े एक कार्यक्रम के नाम पर कथित रूप से अवैध व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कीं। जयदीप मुखर्जी नामक व्यक्ति ने दोनों के खिलाफ करोड़ों रुपये के कथित वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर बउबाजार थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की।

शुक्रवार को न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता ने मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। इस मामले पर 17 जून को सुनवाई होने की संभावना है।

शिकायतकर्ता जयदीप मुखर्जी का आरोप है कि दुर्गापूजा के नाम पर ‘प्रीव्यू शो’ और ‘प्रिविलेज्ड पूजा एंट्री’ टिकटों की बिक्री की योजना बनाई गई थी। आरोप के अनुसार, इस कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार में यूनेस्को के नाम का इस्तेमाल इस तरह किया गया कि आम लोगों को यह आभास हो कि कार्यक्रम को यूनेस्को की मंजूरी या प्रत्यक्ष साझेदारी प्राप्त है।

शिकायत में कहा गया है कि यूनेस्को ने कभी भी इस प्रकार की किसी व्यावसायिक साझेदारी या समझौते को स्वीकृति नहीं दी। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उन्होंने यूनेस्को से प्राप्त ई-मेल और अन्य कानूनी दस्तावेज भी शिकायत के साथ जमा किए हैं, जिनमें ऐसे किसी व्यावसायिक उपयोग की अनुमति का उल्लेख नहीं है।

आरोप यह भी है कि दुर्गापूजा को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन से जोड़कर एक व्यावसायिक मॉडल तैयार किया गया और विशेष टिकटों की बिक्री के माध्यम से आर्थिक लाभ अर्जित करने का प्रयास किया गया।

हालांकि इंद्रनील सेन और उनकी पत्नी की ओर से आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है। फिलहाल दोनों ने गिरफ्तारी से संरक्षण के लिए अदालत की शरण ली है। मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होने की संभावना है, जहां अदालत अग्रिम जमानत याचिका पर विचार करेगी।

   

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