डामर संकट से जयपुर में सड़क निर्माण प्रभावित, मानसून से पहले मरम्मत बड़ी चुनौती
- DSS Admin
- Jun 19, 2026
जयपुर, 19 जून (हि.स.)। प्रदेश में मानसून की दस्तक से पहले जयपुर सहित राजस्थान के कई शहरों में सड़क मरम्मत और निर्माण कार्य डामर (बिटुमेन) की बढ़ी कीमतों के कारण प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि समय रहते मरम्मत नहीं होने पर बारिश के दौरान दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
जानकारी के अनुसार ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे डामर की कीमत लगभग दोगुनी होकर 45 हजार रुपये प्रति टन से बढ़कर करीब 85 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच गई। इसके चलते जयपुर सहित प्रदेशभर में 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक के सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य प्रभावित हुए हैं।
जेडीए, नगर निगम, रीको, सार्वजनिक निर्माण विभाग और राजस्थान आवासन मंडल के कई ठेकेदारों के पास डामर का स्टॉक लगभग समाप्त हो चुका है। कई स्थानों पर सड़कें खुदी हुई हैं, जबकि कुछ जगहों पर केवल बजरी डालकर छोड़ दिया गया है। वार्षिक दर अनुबंध (एआरसी) के तहत संचालित अधिकांश परियोजनाओं में लागत वृद्धि का प्रावधान नहीं होने से ठेकेदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसके चलते कई कार्यों की गति धीमी हो गई है या वे ठप पड़ गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलभराव संभावित क्षेत्रों और गड्ढों वाली सड़कों की मरम्मत के लिए इंटरलॉकिंग टाइल्स और सीमेंट आधारित विकल्पों का उपयोग किया जा सकता है। इससे मानसून के दौरान दुर्घटनाओं की आशंका को कम किया जा सकता है।
जेडीए के डायरेक्टर इंजीनियर संजीव कुमार ने बताया कि बारिश से पूर्व क्षतिग्रस्त सड़कों पर जीएसबी और डब्ल्यूबीएम सामग्री भरकर उन्हें दुरुस्त किया जाएगा। वहीं जलभराव वाले क्षेत्रों में इंटरलॉकिंग टाइल्स सहित अन्य वैकल्पिक उपायों से सड़कें ठीक की जाएंगी।
इस बीच सड़क निर्माण क्षेत्र में प्लास्टिक वेस्ट, फ्लाई ऐश और पुरानी सड़कों से प्राप्त सामग्री के पुनः उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस तकनीक से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ निर्माण लागत में भी कमी लाई जा सकती है। तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में प्लास्टिक मिश्रित सड़कों के सफल प्रयोग से बेहतर परिणाम सामने आए हैं। जयपुर में भी इस संबंध में कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं और आधुनिक सड़क निर्माण तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है।
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