बायो वेस्ट से बनेगी कंप्रेस्ड बायो गैस, नगर निगम तैयार करेगा नया प्लांट

जयपुर, 05 जुलाई (हि.स.)। जयपुर नगर निगम शहर में ठोस कचरा प्रबंधन को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में नई पहल करने जा रहा है। निगम अब बायो वेस्ट के निस्तारण के लिए कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) प्लांट स्थापित करेगा। यह परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर विकसित की जाएगी। इसके लिए निगम ने तैयारियां शुरू कर दी हैं और प्लांट के लिए उपयुक्त भूमि की तलाश की जा रही है। संभावना है कि यह परियोजना लांगड़ियावास क्षेत्र में स्थापित की जाएगी।

नगर निगम आयुक्त ओम कसेरा ने बताया कि निगम कचरा प्रबंधन के विभिन्न क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक के उपयोग पर लगातार काम कर रहा है। घरों से निकलने वाले ठोस कचरे से बिजली उत्पादन, निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (सीएंडडी) कचरे से निर्माण सामग्री तैयार करने के बाद अब बायो वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण की दिशा में भी कदम बढ़ाया जा रहा है।

बायो वेस्ट अथवा जैव-चिकित्सा कचरा अस्पतालों, क्लीनिकों, प्रयोगशालाओं और पशु चिकित्सालयों से उपचार, जांच एवं टीकाकरण के दौरान निकलने वाला खतरनाक अपशिष्ट होता है। इसमें इस्तेमाल की गई सुइयां, पट्टियां, खून से सनी सामग्री, मानव अंग, दवाइयां तथा अन्य संक्रमित वस्तुएं शामिल होती हैं। संक्रमण के खतरे को देखते हुए इस कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण अनिवार्य है।

बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के तहत इस कचरे को अलग-अलग रंग के कंटेनरों में संग्रहित किया जाता है। पीले रंग के कंटेनर में संक्रमित अंग, ड्रेसिंग सामग्री और पीपीई किट, लाल रंग में प्लास्टिक आधारित चिकित्सा सामग्री, नीले रंग में कांच की बोतलें और शीशियां तथा सफेद अथवा पारदर्शी कंटेनर में सुइयां, ब्लेड और अन्य धारदार धातु सामग्री रखी जाती है। इसके बाद अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से इनका भस्मीकरण या ऑटोक्लेविंग कर सुरक्षित निस्तारण किया जाता है।

इधर नगर निगम का लांगड़ियावास स्थित सीएंडडी वेस्ट प्लांट भी प्रभावी रूप से कार्य कर रहा है। यहां पुराने भवनों से निकलने वाले मलबे का पुनर्चक्रण कर इंटरलॉकिंग टाइल्स, ईंटें, ब्लॉक, गिट्टी और अन्य निर्माण सामग्री तैयार की जा रही है। प्लांट में प्रतिदिन करीब 300 टन निर्माण मलबे का संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण किया जाता है। इसके अलावा लांगड़ियावास स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट में प्रतिदिन लगभग 900 टन ठोस कचरे का निस्तारण कर बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। प्लांट से उत्पादित बिजली जयपुर डिस्कॉम को उपलब्ध कराई जा रही है। प्लांट से निकलने वाले उपचारित जल का उपयोग पेड़-पौधों की सिंचाई में किया जा रहा है। नगर निगम के अनुसार शहर में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए 300 टन प्रतिदिन क्षमता वाला नया मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) प्लांट भी विकसित किया जा रहा है, जबकि एक अन्य एमआरएफ प्लांट पहले से संचालित है, जहां कचरे की छंटाई के बाद उपयोगी सामग्री का पुनर्चक्रण तथा शेष अपशिष्ट का सीमेंट उद्योग में ईंधन के रूप में उपयोग किया जा रहा है।

---------------

   

सम्बंधित खबर