प्रशांत किशोर अचानक पहुंचे जदयू नेता मुजाहिद आलम के आवास, चर्चाओं का बाजार हुआ गर्म
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- Mar 31, 2025

किशनगंज,31मार्च(हि.स.)। जन सुराज पार्टी के सुप्रीमो प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भरोसेमंद नेता को अपने पाले में करने के लिए पूरा जोर लगा दिया हैं। उसी क्रम प्रशांत किशोर अपनी टीम के साथ ईद की नमाज के ठीक बाद जदयू के पूर्व विधायक सह किशनगंज जिलाध्यक्ष मुजाहिद आलम के पैतृक गांव कोचाधामन के कैरीबीरपुर पहुंच कर उन्हें ईद की मुबारकबाद दी। प्रशांत किशोर करीब एक घंटे तक पूर्व विधायक मुजाहिद आलम के घर पर रहे।
गौर करे कि पूर्व विधायक मुजाहिद आलम सीमांचल में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुराने एवं भराेसेमंद नेता माने जाते हैं। वह जमीनी स्तर पर काफी मजबूत पकड़ रखते हैं। इनके बारे में एक कहावत है कि चुनाव हारने के बावजूद कभी घर नहीं बैठते हैं। 18 घंटे फील्ड में रहते हैं। दो बार विधायक रहकर बीते वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए कैंडिडेट के तौर पर किशनगंज संसदीय सीट से मुजाहिद आलम चुनाव लड़े एवं कांग्रेस सांसद को कड़ी टक्कर दिया और करीब 59 हजार वोटों से हार गये। पूर्व विधायक मुजाहिद आलम के आग्रह पर सीएम कई बड़े सौगात किशनगंज को दे चुके हैं। यही कारण है कि नीतीश कुमार मुजाहिद आलम को अपना काफी भरोसे मंद मानते हैं। प्रशांत किशोर से जब मुलाकात के मायने पूछा गया तो पहले उन्होंने कहा कि ईद की मुबारकबाद देने ही आये थे लेकिन बार बार पूछने पर ईशारों इशारों में कहा मुजाहिद आलम अपनी मेहनत की बदौलत खुद एक ब्रांड बने हुए हैं। आवाम में काफी लोकप्रिय हैं। जन सुराज ऐसे हीरों की कद्र करता है जो समाज एवं क्षेत्र की तरक्की के लिए जमीनी स्तर पर लोगों से हमेशा जुड़े रहें। टीम में शामिल कोर कमेटी के सदस्यों ने दबी जुबान में कहा कि डेढ़ साल से इस दिन का इंतजार हम लोग कर रहे थे कि दोनों नेताओं की मुलाकात हो जाए। लेकिन मुजाहिद आलम हमेशा टाल मटोल कर रहे थे। आज बड़ी मुश्किल से ईद के बहाने मुलाकात सम्भव हो पाई है। आने वाला पल जन सुराज और कोचाधामन के लिए बेहतर रहेगा। अगर मुजाहिद आलम जन सुराज में जुड़ते हैं तो एनडीए ही नहीं बल्कि राजद कांग्रेस गठबंधन को भारी नुकसान होने की सम्भावना है।
मुजाहिद आलम कोचाधामन विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2010 में एनडीए से चुनाव लड़कर 8 हजार वोटों से हारे थे। कोचाधामन से ही वर्ष 2014 के उप चुनाव में कांग्रेस एवं राजद गठबंधन के उम्मीदवार को हरा कर पहली बार विधायक बने थे। वहीं 2015 में महागठबंधन के टिकट पर हॉट सीट कहे जाने वाले कोचाधामन विस क्षेत्र से ही चुनीव लड़े एवं ओवैसी की पार्टी ऑल इण्डिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के बिहार प्रदेश अध्यक्ष को करारी शिकस्त दी। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव से पूर्व मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में लोग एनआरसी, एनपीआर एवं सीएए के खिलाफ आक्रोशित थे।सभी एनडीए तथा नीतीश कुमार से नाराज थे, तभी चुनाव हो गया एवं मुजाहिद पब्लिक के गुस्से का शिकार हो गये और कुछ वोटों से मीम पार्टी से हार गये।
हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह