राणा ने मेढर के सुदूर सीमावर्ती गांवों में 57.98 करोड़ की विकास परियोजनाओं का किया शुभारंभ

राणा ने मेढर के सुदूर सीमावर्ती गांवों में 57.98 करोड़ की विकास परियोजनाओं का किया शुभारंभ


पुंछ, 17 मई । जल शक्ति, वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण एवं जनजातीय मामलों के मंत्री जावेद अहमद राणा ने आज मेढर में 57.98 करोड़ की कई प्रमुख विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इन परियोजनाओं का उद्देश्य कई सुदूर और सीमावर्ती गांवों में पेयजल आपूर्ति, सिंचाई बुनियादी ढांचे और ग्रामीण संपर्क को मजबूत करना है।

इन परियोजनाओं में केंद्र शासित प्रदेश के पूंजीगत व्यय कार्यक्रम के तहत 51.84 करोड़ की कुल लागत वाली 20 जल आपूर्ति योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य मेढर उपमंडल के उन गांवों में कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराना है जहां पानी की आपूर्ति नहीं है और जहां पानी की कमी है ताकि हजारों निवासियों को सुरक्षित और पीने योग्य पानी मिल सके।

इसके अतिरिक्त क्षेत्र में जल प्रबंधन बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और सुदृढ़ीकरण के लिए 3.62 करोड़ की सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया। छत्राल नाले पर लगभग 2.52 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाले मोटर योग्य पुल की नींव भी रखी गई जिससे सड़क संपर्क में सुधार होगा और स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान हो जाएगी।

स्थानीय निवासियों, जन प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की एक बड़ी सभा को संबोधित करते हुए राणा ने उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार की समान और समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया विशेष रूप से दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों में जो लंबे समय से उपेक्षित रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षित पेयजल, कुशल सिंचाई और बेहतर संपर्क दूरदराज के क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार और सतत सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।

मंत्री ने कहा, “ये परियोजनाएं केवल बुनियादी ढांचागत कार्य नहीं हैं बल्कि ये प्रशासन के इस संकल्प को दर्शाती हैं कि विकास हर घर, हर खेत और हर कोने तक पहुंचे चाहे वह कितना भी दूरस्थ क्यों न हो।”

जिम्मेदार जल प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए राणा ने कहा कि बुनियादी ढांचे का निर्माण जल संसाधनों के संरक्षण और कुशल उपयोग के साथ-साथ होना चाहिए।

पानी उपलब्ध कराना तो आधा काम है; इसका प्रबंधन और संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बचाया गया पानी कमाया गया पानी है और हर समुदाय को इस अवसंरचना को एक साझा सार्वजनिक संपत्ति के रूप में मानना चाहिए।

मंत्री ने कार्यान्वयन एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन करते हुए सभी परियोजनाओं को समय पर पूरा करें। उन्होंने निरंतर निगरानी और जवाबदेही की आवश्यकता पर बल दिया ताकि इन योजनाओं का लाभ लोगों तक अनावश्यक देरी के बिना पहुंच सके।

सिंचाई घटक के बारे में बोलते हुरए राणा ने कहा कि नहरों और खुलों के आधुनिकीकरण से किसानों को अपनी कृषि उत्पादकता बढ़ाने, पानी की बर्बादी को कम करने और सिंचाई दक्षता में सुधार करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने आगे कहा कि बाढ़ सुरक्षा उपाय भारी बारिश और अचानक बाढ़ के दौरान कृषि भूमि और आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा भी करेंगे।

कनेक्टिविटी पहल के तहत, मंत्री ने एसके रोड पर छत्राल नाले के ऊपर 60 मीटर के सिंगल-लेन प्लेट गर्डर मोटर योग्य पुल के निर्माण की आधारशिला रखी।

लोक निर्माण एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा पुल क्षेत्र स्थायी जीर्णोद्धार 2025-26 कार्यक्रम के तहत निर्मित इस पुल से क्षेत्र में आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।

पुल परियोजना के महत्व को रेखांकित करते हुए राणा ने कहा कि छत्राल के निवासियों को उचित मोटर योग्य पुल न होने के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

उन्होंने कहा, “यह पुल न केवल निवासियों के दैनिक आवागमन को सुगम बनाएगा बल्कि आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी खोलेगा, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा तक समय पर पहुंच सुनिश्चित करेगा और इस दूरस्थ क्षेत्र को मेंढर के शेष भाग से बेहतर ढंग से जोड़ेगा।”

प्रमुख परियोजनाओं के शुभारंभ के तहत मंत्री ने सिंचाई उपमंडल मेंढर सहित पीएचई डिवीजन मेंढर कार्यालय परिसर के निर्माण की आधारशिला भी रखी।

कार्यक्रम में जल शक्ति विभाग, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, जिला प्रशासन, स्थानीय प्रतिनिधियों और स्थानीय निवासियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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