वक्फ संशोधन बिल कांग्रेस की तुष्टीकरण नीति के ताबूत की आखिरी कील : परमार

धर्मशाला, 03 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष व विधायक विपिन सिंह परमार ने वक्फ संशोधन विधेयक को पिछड़े और गरीब मुसलमानों के भविष्य के लिए वरदान करार दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों द्वारा देश में लोगों को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें वे कभी कामयाब नहीं होंगे।

वीरवार को यहां से जारी प्रेस बयान में भाजपा नेता ने कहा कि यह कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति के ताबूत में आखिरी कील साबित होने जा रहा है। कांग्रेस की राजनीति अब खत्म होने की कगार पर है। इनके नेता अब छटपटा रहे हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार एक के बाद एक ऐतिहासिक फैसले ले रही है, जिससे कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की वोट बैंक की राजनीति का खात्मा हो रहा है।

उन्होंने कहा कि वक़्फ़ बोर्ड को भू-माफियाओं और लुटेरों के चंगुल से मुक्त करवाकर गरीब मुसलमानों के हित में इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है, लेकिन कुछ लोग इसे गरीब मुसलमानों के हित में इस्तेमाल करने की बजाय भू-माफियाओं की कठपुतली बनकर काम कर रहे हैं। यह दुखद है, उन्हें गरीब मुसलमानों की चिंता करनी चाहिए थी लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस चिंता को समझा और गरीब और पिछड़े मुसलमानों के उत्थान के लिए ये बिल लाया है। यह विधेयक कहीं से भी असंवैधानिक नहीं है अब से पहले तक इस एक्ट में 5 बार संशोधन हो चुके हैं। जब यह तब असंवैधानिक नहीं था, तब यह संशोधन अब असंवैधानिक कैसे हो गया? उन्होंने कहा कि 2013 में कांग्रेस की यूपीए सरकार ने इसमें गैरकानूनी तरीके से संशोधन कर वक्फ बोर्ड को असीमित अधिकार दे दिया कि वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन पर अपना अधिकार जता सकता है।

परमार ने कहा कि वक्फ से जुडी समस्या केवल मुसलमानों की नहीं है, बल्कि इससे बड़े पैमाने पर हिंदू, सिख, बौद्ध, इसाई और यहां तक कि मुस्लिम भी पीड़ित हैं। कई ऐसे मामले आये हैं जिसमें वक्फ ने मनमाने तरीके से मंदिरों, गुरुद्वारों और यहां तक कि पूरे गांव को ही वक्फ की प्रॉपर्टी बता दिया है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतिंदर धलारिया

   

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