मप्र की ऐतिहासिक भोजशाला में मनाया गया 'महासत्याग्रह' और 'महाविजय महोत्सव'
- DSS Admin
- May 19, 2026


- लोग आतिशबाजी करते हुए मंदिर पहुंचे, महाआरती और हवन में शामिल हुए सैकड़ों श्रद्धालु
धार, 19 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के धार जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में उच्च न्यायालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के ऐतिहासिक फैसले के बाद मंगलवार को 'महासत्याग्रह' और 'महाविजय महोत्सव' मनाया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु आतिशबाजी करते हुए भोजशाला पहुंचे और महाआरती और हवन में शामिल हुए।
दरअसल, मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने अपने ऐतिहासिक फैसले में भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर माना है और इसके बाद एएसआई ने भी एक आदेश जारी कर हिंदू समाज को साल के 365 दिन पूजन का अधिकार दे दिया है। इससे हिंदू समाज में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला परिसर पहुंचे। मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना और अखंड ज्योति स्थापना के साथ शुरू हुए आयोजन पर श्रद्धालुओं ने आतिशबाजी कर जश्न मनाया।
सुबह से ही भोजशाला में भक्ति और आस्था का उल्लास देखने को मिला। परिसर में आयोजित भजन संध्या में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। हवन और महाआरती के बाद श्रद्धालुओं ने जमकर आतिशबाजी कर अपनी खुशी जताई। पूरे परिसर में जयकारों के बीच बसंत पंचमी और दीपावली जैसा उत्सव नजर आया। आयोजन के दौरान पुलिस-प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह चाक-चौबंद रही।
भोज उत्सव समिति के गोपाल शर्मा ने बताया कि प्रति मंगलवार भोजशाला में सत्याग्रह होता है, लेकिन 365 दिन पूजन के आदेश के बाद यह पहला मंगलवार था। इसीलिए इसे 'महासत्याग्रह' का नाम दिया गया। सत्याग्रह के पश्चात अखंड ज्योति मंदिर पर आतिशबाजी कर विजय महोत्सव मनाने के लिए श्रद्धालु अपने-अपने घरों से पटाखे लेकर पहुंचे।
भोजशाला पहुंचे श्रद्धालुओं की जुबां पर अब एक ही बात है कि मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को लंदन से वापस लाया जाए। उनका कहना है कि मां की आत्मा यहां स्थापित हो चुकी है, अब जल्द ही मूल स्वरूप को भी स्थापित किया जाना चाहिए।
24 घंटे विराजमान रहा था मां का स्वरूप
गौरतलब है कि रविवार को हिंदू समाज द्वारा मां वाग्देवी के प्रतिकृति स्वरूप की स्थापना कर पूरे दिन अनुष्ठान किए गए थे। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ था जब पूरे 24 घंटे तक मां का स्वरूप भोजशाला में विराजमान रहा और अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित रही। अब समाज द्वारा प्रतिदिन यहां मां का पूजन किया जाएगा।
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