आरपीएससी भर्ती में फर्जी डिग्री रैकेट मामले में मेवाड़ यूनिवर्सिटी का कर्मचारी गिरफ्तार

जयपुर, 29 मई (हि.स.)। राजस्थान लोकसेवा आयोग (आरपीएससी) की प्राध्यापक-हिंदी (स्कूल शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा-2022 में फर्जी डिग्री के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने कार्रवाई करते हुए मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार (चित्तौड़गढ़) के फाइलिंग असिस्टेंट बीरेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोपित को कोर्ट में पेश कर 30 मई तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है। एसओजी को पूछताछ में फर्जी डिग्री गिरोह से जुड़े कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है।

एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि प्राध्यापक-हिंदी भर्ती परीक्षा-2022 में पात्रता जांच के दौरान अभ्यर्थी ब्रह्मा कुमारी ने आयोग में मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार से जारी एमए हिंदी की डिग्री प्रस्तुत की थी। दस्तावेजों के सत्यापन में सामने आया कि यह डिग्री विश्वविद्यालय द्वारा जारी ही नहीं की गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि अभ्यर्थी ने झूठा शपथ पत्र पेश कर फर्जी डिग्री के आधार पर नियुक्ति हासिल करने का प्रयास किया था। इस संबंध में अजमेर के सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज किया गया, जिसकी जांच एसओजी कर रही है।

एसओजी जांच में खुलासा हुआ कि मेवाड़ यूनिवर्सिटी के फाइलिंग असिस्टेंट बीरेंद्र सिंह ने यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट कौशल किशोर चंद्रुल, ध्वज कीर्ति शर्मा, सुशील कुमार शर्मा, राजेश सिंह राणावत और अन्य लोगों के साथ मिलकर पूरी साजिश रची। आरोपी ने अपनी ईमेल आईडी से दिल्ली स्थित एक प्रिंटिंग प्रेस को मेल भेजकर ब्रह्मा कुमारी के नाम से एमए (हिंदी) की फर्जी डिग्री छपवाई। बाद में यूनिवर्सिटी के अधिकारियों के हस्ताक्षर करवाकर यह डिग्री अभ्यर्थी को उपलब्ध कराई गई।

एसओजी के अनुसार आरोपित बीरेंद्र सिंह के खिलाफ पहले भी अजमेर के सिविल लाइंस थाने में फर्जी डिग्री जारी करने में सहयोग करने का मामला दर्ज हो चुका है, जिसमें उसे गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा गुजरात के आनंद थाने में भी इसी प्रकार का मामला दर्ज है, जहां भी उसकी गिरफ्तारी हो चुकी है।

एसओजी ने बताया कि इस फर्जी डिग्री प्रकरण में अब तक मुख्य अभ्यर्थी ब्रह्मा कुमारी सहित कुल 12 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोपित बीरेंद्र सिंह मूल रूप से दोगाथ उत्तर प्रदेश का निवासी है और वर्तमान में गाजियाबाद में रह रहा था। एसओजी अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और फर्जी डिग्री नेटवर्क की कड़ियों को खंगालने में जुटी है।

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