पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला : पंचायतों का होगा विशेष ऑडिट, भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच कर्मचारियों के तबादले

कोलकाता, 04 जून (हि. स.)। पश्चिम बंगाल सरकार के ग्रामीण विकास विभाग ने राज्य की ग्राम पंचायतों में कथित भ्रष्टाचार के बढ़ते आरोपों के बीच व्यापक स्तर पर विशेष ऑडिट शुरू करने का निर्णय लिया है। साथ ही लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कर्मचारियों के तत्काल तबादले का भी फैसला लिया गया है।

ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने गुरुवार को जानकारी देते हुए कहा कि राज्य की लगभग 10 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में पहले चरण में विशेष ऑडिट किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों से भ्रष्टाचार से संबंधित सर्वाधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जांच के दायरे में रखा जाएगा।

राज्य में कुल तीन हजार 339 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें से पहले चरण में 10 प्रतिशत पंचायतों का ऑडिट किया जाएगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी और इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह विशेष ऑडिट पंचायत स्तर पर वित्तीय प्रबंधन, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितताओं की जांच के उद्देश्य से किया जा रहा है। जिन पंचायतों पर धन के दुरुपयोग, अनियमित व्यय, कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में गड़बड़ी या राहत सामग्री वितरण में शिकायतें दर्ज हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जांच के दायरे में लाया जाएगा।

हाल के दिनों में राज्य के विभिन्न जिलों में राहत सामग्री के कथित गबन और जमाखोरी के आरोपों में कई तृणमूल कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी भी हुई है। उत्तर 24 परगना के बड़ुइया, नदिया, दक्षिण 24 परगना के मथुरापुर, आसनसोल और पूर्व बर्धमान के कालना जैसे क्षेत्रों से इस तरह के मामले सामने आए हैं।

राज्य सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में ऐसे कर्मचारियों का तत्काल तबादला किया जाएगा जो तीन वर्षों से अधिक समय से एक ही स्थान पर तैनात हैं। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाना और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करना है।

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