स्ट्रॉबेरी की लालिमा से बदली बालकृष्ण की तकदीर, बागवानी बनी स्वरोजगार की नई पहचान
- DSS Admin
- Jul 05, 2026

मंडी, 05 जुलाई (हि.स.)। आधुनिक खेती, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, तकनीकी मार्गदर्शन तथा बागवानी को प्रोत्साहित करने के प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं का रुझान स्वरोजगार की ओर बढ़ा है। सरकारी या निजी नौकरी के पीछे भागने के बजाय आधुनिक खेती और बागवानी अपनाकर युवा आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
मंडी जिला के करसोग उपमंडल की ग्राम पंचायत सोमाकोठी के बालकृष्ण इसका प्रेरक उदाहरण हैं, जिन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती से अपनी अलग पहचान बनाई है। बालकृष्ण पहले एक निजी कंपनी में कार्यरत थे। जीवन सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी नौकरी चली गई। कठिन दौर में उन्होंने निराश होने के बजाय अपने गांव लौटकर बागवानी को स्वरोजगार के रूप में अपनाने का निर्णय लिया। नई राह की तलाश में उन्होंने स्ट्रॉबेरी जैसी उच्च मूल्य वाली नगदी फसल की खेती शुरू की।
उन्होंने लगभग एक बीघा भूमि पर स्ट्रॉबेरी की व्यावसायिक खेती शुरू की। पहाड़ी क्षेत्र में इस प्रकार की नगदी फसल उगाना आसान नहीं था। आज उनके खेतों में तैयार होने वाली ताजा स्ट्रॉबेरी स्थानीय बाजार में अपनी गुणवत्ता और स्वाद के कारण विशेष पहचान बना चुकी है।
फसल तैयार होने पर वह स्वयं अपनी कार के माध्यम से इसे विभिन्न स्थानीय बाजारों तक पहुंचाते हैं और सीधे उपभोक्ताओं को बेचते हैं। इससे बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और बेहतर मूल्य प्राप्त होता है। स्थानीय बाजार में स्ट्रॉबेरी का 300 से 500 रुपए प्रति किलोग्राम तक भाव मिलता है। यही कारण है कि आज वे केवल एक बीघा भूमि से प्रतिमाह लगभग 12 से 15 हजार रुपए की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।
बालकृष्ण भविष्य के लिए भी बड़ी योजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने लगभग दो लाख स्ट्रॉबेरी पौधों की नर्सरी तैयार की है। इनमें से करीब एक लाख पौधे वह अपने खेतों में बड़े स्तर पर लगाने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि शेष पौधे क्षेत्र के इच्छुक किसानों को उपलब्ध करवाने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक किसान स्ट्रॉबेरी की खेती अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें। इसके अलावा उन्होंने ब्लूबेरी, एप्रीकॉट खुबानी, प्लम तथा अन्य उच्च मूल्य वाली फल फसलों की खेती का भी लक्ष्य निर्धारित किया है।
उनका मानना है कि यदि किसान समय की मांग के अनुसार फसलों का चयन करें और आधुनिक तकनीकी अपनाएं तो बागबानी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है। आज खेती केवल परंपरागत आजीविका नहीं, बल्कि एक सफल व्यवसाय है। यदि सही योजना, आधुनिक तकनीक और बाजार की समझ के साथ कार्य किया जाए तो कम भूमि पर भी अच्छी आय अर्जित की जा सकती है।
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