तृणमूल में बढ़ी अंदरूनी कलह, हावड़ा जिला परिषद और बांकुड़ा नगरपालिका में अविश्वास प्रस्ताव
- DSS Admin
- Jun 10, 2026
कोलकाता, 10 जून (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। बुधवार को हावड़ा जिला परिषद और बांकुड़ा नगरपालिका में पार्टी के जनप्रतिनिधियों ने अपने ही नेतृत्व के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी।
हावड़ा में तृणमूल के बागी सदस्य तुषार घोष के नेतृत्व में 28 सदस्यों ने जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सौंपा। यह प्रस्ताव राज्य सरकार के पंचायत विभाग के तहत हावड़ा के प्रभारी डिवीजनल कमिश्नर को दिया गया। 42 सदस्यीय हावड़ा जिला परिषद में बहुमत के लिए 22 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में 28 सदस्यों के एक साथ विरोध में आने से वर्तमान बोर्ड पर संकट गहरा गया है।
तुषार घोष ने आरोप लगाया कि जिला परिषद का कामकाज कुछ नेताओं के इशारे पर चल रहा था और सदस्यों को विकास कार्यों पर अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिलता था। उन्होंने जिला परिषद में भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाए। वहीं, उपाध्यक्ष अजय भट्टाचार्य ने कहा कि उन्हें अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पत्र नहीं मिला है। पत्र मिलने पर जवाब दिया जाएगा।
उधर, बांकुड़ा नगरपालिका में भी तृणमूल के 16 पार्षदों ने नगर प्रमुख अलका सेन मजूमदार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दायर किया है। उप-नगर प्रमुख समेत 16 पार्षदों के हस्ताक्षर वाला यह प्रस्ताव जिला प्रशासन को सौंपा गया।
24 सदस्यीय बांकुड़ा नगरपालिका में तृणमूल के 21 पार्षद हैं। बागी पार्षदों का आरोप है कि नगर प्रमुख एकतरफा तरीके से नगरपालिका चला रही हैं। उनके खिलाफ भाजपा के साथ नजदीकी संबंध रखने के आरोप भी लगाए गए हैं। पार्षदों का दावा है कि हाल की एक बोर्ड बैठक में नगर प्रमुख ने भाजपा के सुझावों के अनुसार क्षेत्र में काम करने की बात कही थी।
हालांकि, अलका सेन मजूमदार ने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें अविश्वास प्रस्ताव की जानकारी नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, दिन में अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले कुछ पार्षदों ने बाद में अपना समर्थन वापस लेने की कोशिश भी की है। वहीं, राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ हलकों में अविश्वास प्रस्ताव के पीछे आर्थिक लेन-देन के आरोप भी लगाए जा रहे हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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