वेदों से ही संभव सृष्टि, धर्म और मानव जीवन का सही ज्ञान-स्वामी राम स्वरूप जी

True knowledge of creation, religion and human life is possible only through the Vedas - Swami Ram Swaroop Ji


कठुआ, 12 मई । वेद मंदिर योल में आयोजित 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 31वें दिन स्वामी राम स्वरूप योगाचार्य ने श्रद्धालुओं को वेदों के महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भिन्न-भिन्न देशों के अलग-अलग इतिहास, संविधान और संस्कृतियां हैं लेकिन सृष्टि के प्रारंभ में पूरी पृथ्वी पर एक ही राजा और एक ही व्यवस्था थी जिसका वर्णन वेदों में मिलता है।

स्वामी जी ने बताया कि प्रलय के पश्चात जब परमेश्वर सृष्टि की रचना करता है तब सम्पूर्ण ज्ञान वेदों के माध्यम से ही प्रकट होता है। इसलिए सृष्टि की उत्पत्ति, प्राचीन संस्कृति और मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने के लिए वेदों का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि वेदों के अतिरिक्त ऐसा गूढ़ और व्यापक ज्ञान कोई अन्य प्रदान नहीं कर सकता। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान युग में मनुष्य ने वेदज्ञ तपस्वियों से गुरू-शिष्य परंपरा के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करने की परंपरा को त्याग दिया है और अपने-अपने तरीके से भक्ति के मार्ग बना लिए हैं। इस संदर्भ में उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास के दोहे का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य मोहवश वेदसम्मत भक्ति मार्ग को छोड़कर अनेक नए पंथों की कल्पना कर रहा है।

स्वामी राम स्वरूप जी ने सांख्य शास्त्र के मुनि कपिल के सूत्र का हवाला देते हुए कहा कि जो सत्य प्रमाणों से सिद्ध है, उसका विरोध केवल कल्पना के आधार पर नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि वेद, उपनिषद, गीता और रामायण जैसे ग्रंथों में वर्णित ज्ञान ही प्रमाणिक और सत्य है जिसे प्राचीन ऋषि-मुनियों, भगवान श्रीराम और योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अपने जीवन में अपनाया। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे वेदों और योग विद्या को अपने जीवन में अपनाकर सच्चे मार्ग पर चलें क्योंकि यही मानव जीवन के कल्याण का आधार है।

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