सूक्ष्म सिंचाई तकनीक से बढ़ेगी किसानों की आय

हरिद्वार, 23 मई (हि.स.)। कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली की स्थापना एवं संचालन पर आयोजित चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शनिवार को समापन हुआ। प्रशिक्षण में किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीकों, जल संरक्षण और उन्नत कृषि पद्धतियों की विस्तृत जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के दौरान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. पुरुषोत्तम कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि जल एक सीमित प्राकृतिक संसाधन है, इसलिए इसके उपयोग में दक्षता बढ़ाना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि फसल उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली को अपनाना समय की मांग बन चुका है।

प्रशिक्षण के समन्वयक इंजीनियर उमेश कुमार सक्सेना ने तकनीकी व्याख्यान में बताया कि सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली एक उन्नत तकनीक है, जिसमें कम दबाव पर पानी सीधे पौधों की जड़ क्षेत्र तक पहुंचाया जाता है। इससे 40 से 70 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है, वहीं ऊर्जा और मजदूरी लागत में भी कमी आती है। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली से गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के साथ 30 से 40 प्रतिशत तक उपज वृद्धि संभव है। साथ ही घुलनशील उर्वरकों का उपयोग भी पानी के साथ प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

उन्होंने किसानों को ड्रिप, स्प्रिंकलर और रेन गन जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों की तकनीकी जानकारी भी प्रदान की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती, उन्नत सब्जी उत्पादन, पशुपालन तथा पॉलीहाउस में सब्जी उत्पादन जैसे समसामयिक कृषि विषयों पर भी चर्चा की गई।

कार्यक्रम में केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. नीलकंठ, डॉ. योगेंद्र पाल सैनी, डॉ. विनोद, डॉ. रेनू, डॉ. सरिता, डॉ. आशीष मलिक और डॉ. स्वतंत्र प्रताप सहित अन्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण में प्रगतिशील किसान सत्येंद्र त्यागी और सुभाष सहित उद्यान विभाग के कर्मचारी, क्वांटम विश्वविद्यालय के कृषि विभाग के छात्र-छात्राएं तथा कुल लगभग 108 प्रतिभागियों ने भाग लिया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय सूक्ष्म सिंचाई मिशन द्वारा वित्तपोषित था।

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