महाराष्ट्र में 30 लॉ कॉलेजों की संलग्नता रद्द करने पर हंगामा
- DSS Admin
- Jul 06, 2026
मुंबई, 06 जुलाई (हि.स.)। मुंबई विश्वविद्यालय (एमयू) के अधीन 30 लॉ कालेजों की संलग्नता रद्द करने पर महाराष्ट्र में हंगामा खड़ा होता नजर आ रहा है। प्रवेश प्रक्रिया के दौरान कॉलेजों की संलग्नता रद्द के राज्य सरकार के फैसले पर छात्रों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। एनसीपी (शरद पवार गुट) ने विद्यार्थियों का भविष्य खराब होने का हवाला देते हुए राज्य सरकार से तुरंत निर्णय वापस लेने की मांग की है। अन्यथा उग्र आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी गई है।
एनसीपी (एसपी) के प्रदेश प्रवक्ता व यूथ मुंबई के अध्यक्ष एड. अमोल मातेले ने इस संबंध में उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल और एमयू के उपकुलपति डॉ. रवींद्र कुलकर्णी को पत्र लिखा है और फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की गई है। मातेले के अनुसार लॉ प्रवेस की प्रक्रिया शुरू होने से कुछ दिन पहले कॉलेजों की संलग्नता रद्द करना हजारों विद्यार्थियों के सपनों पर हमला करने जैसा है। कॉलेज प्रबंधन की गलतियों के लिए विद्यार्थियों को सजा देना अन्याय है। इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका आरोप है कि सत्ताधारी दलों से जुड़े कुछ कॉलेजों को नियमों में छूट दी गई है, जबकि कुछ कॉलेजों पर बहुत सख्त नियम लागू किए गए हैं। यह मामला एजुकेशन सिस्टम में बराबरी के सिद्धांत का उल्लंघन है। कॉलेजों की संलग्नता की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सभी कॉलेजों के लिए नियम एक जैसे होने चाहिए। कुछ चुनिंदा संस्थानों को फायदा पहुंचाना और दूसरों पर कार्रवाई करना लोकतंत्र में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मातेले ने कहा कि मुंबई समेत पूरे राज्य में ग्रामीण, किसान, मजदूर, कर्मचारी, ओबीसी, एससी, एसटी, बेसहारा और जरूरतमंद हजारों छात्र बड़ी मुश्किल से अधिकृत शिक्षा का सपना देखते हुए एडमिशन की तैयारी कर रहे हैं। कई माता-पिता लोन लेकर, गहने गिरवी रखकर और ज़िंदगी भर की जमा-पूंजी खर्च करके अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे जमा किए हैं। ऐसे में कॉलेजों की संलग्नता रद्द करना छात्रों की ज़िंदगी और उनके परिवारों की उम्मीदों से खेलने जैसा है।
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