नेशनल करिकूलम फ्रेम वर्क लागू करने वाला देश का पहला बोर्ड बना बीएसबी
- DSS Admin
- May 15, 2026
हरिद्वार, 15 मई (हि.स.)। आजादी के 75 साल बाद भी भारत मैकाले की शिक्षा पद्धति की गुलामी से आजाद नहीं हो पाया है। इस शिक्षा की गुलामी को उखाड़ फेंकने का संकल्प कुछ वर्ष पहले स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने लिया और उनकी सोच को बीएसबी बोर्ड बनाकर भारत सरकार ने साकार कर मजबूती प्रदान की। अब यही बोर्ड, देश को भारतीय शिक्षा बोर्ड के रूप में नई दिशा देते हुए दिख रहा है।
यह बात यूं ही नहीं कही जा रही बल्कि इसके पीछे मजबूत आधार यह है कि भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी) ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से बालवाटिका से माध्यमिक स्तर तक स्कूली शिक्षा के सभी चरणों में राष्ट्रीय पाठ्य चर्चा रूपरेखा-विद्यालयी शिक्षा 2023 (एनसीएफ 2023) व राष्ट्रीय पाठ्यचर्चा रूपरेखा आधारभूत स्तर 2022 (एनसीएफ-एफएस 2022) को लागू करने की घोषणा की है। जिसका सीधा मायने यह है कि मैकाले की शिक्षा की गुलामी से अब भारत आजाद होगा।
भारत सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत यह पहल करने वाला भारतीय शिक्षा बोर्ड देश का पहला विद्यालयी बोर्ड बन गया है। जिसने संपूर्ण विद्यालयी शिक्षा क्रम में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा का व्यापक एवं समग्र कार्यान्वयन सुनिश्चित किया है। यह कार्यान्वयन रटंत शिक्षा पद्धति से आगे बढ़ते हुए दक्षता आधारित, अनुभवात्मक तथा समग्र शिक्षा की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालय अब शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों, बहुभाषी शिक्षा दृष्टिकोण व विभिन्न आयु-स्तरों के अनुरूप पाठ्यचर्या संरचना को अपनाएंगे, जिससे विद्यार्थियों में अवधारणात्मक समझ के साथ-साथ ज्ञान के व्यावहारिक जीवन में उपयोग की क्षमता विकसित होगी।
भारतीय शिक्षा बोर्ड का क्या है उद्देश्य
भारतीय शिक्षा बोर्ड का उद्देश्य समालोचनात्मक चिंतन, सृजनात्मकता, सहयोग, प्रभावी संप्रेषण, डिजिटल साक्षरता तथा समस्या-समाधान जैसी 21 वीं सदी के कौशलों को शिक्षा प्रणाली में समाहित करना है, ताकि शिक्षार्थी तीव्र गति से बदलते वैश्विक परिवेश में सफलतापूर्वक आगे बढ़ने के लिए सक्षम बन सकें। साथ ही, पाठ्यचर्या में भारतीय ज्ञान परंपरा को सार्थक रूप से शामिल किया गया है, जो भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत, मूल्यों तथा स्वदेशी ज्ञान परंपराओं से प्रेरणा ग्रहण करती है।
चेयरमैन, भारतीय शिक्षा बोर्ड डॉ एनपी सिंह, आईएएस (रिटायर्ड) ने कहाकि सच्ची शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह मन, शरीर और आत्मा का पोषण करती है तथा व्यक्तियों को 21वीं सदी के आवश्यक कौशलों से सुसज्जित करती है, जिससे वे आधुनिक विश्व में समाज और राष्ट्र पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकें। इसलिए यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो शिक्षा नीति को कक्षा-स्तर की वास्तविक शिक्षण प्रक्रिया में प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में भारतीय शिक्षा बोर्ड को अग्रणी संस्था के रूप में स्थापित करती है।

