आप पार्षद ने हाईकोर्ट में चुनाव को चुनौती दी:दबाव में हस्ताक्षर और पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप
- Neha Gupta
- Jul 05, 2026
पंजाब जीरकपुर नगर परिषद के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों के चुनाव संपन्न होने के बाद सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) के अंदरूनी मतभेद और असंतोष खुलकर सामने आ गए हैं। पार्टी के अपने ही पार्षद करमजीत सिंह ने पूरी चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा खटखटाया है। पार्षद ने कोर्ट में हलफनामा दायर कर आरोप लगाया है कि उन पर भारी दबाव बनाकर उनकी मर्जी के खिलाफ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए थे। होटल में बंधक बनाकर हस्ताक्षर कराने का आरोप पार्षद करमजीत सिंह द्वारा हाई कोर्ट में दिए गए हलफनामे के अनुसार, यह पूरी साजिश 23 जून को बलटाना के एक होटल में रची गई। वहां करीब 60 लोगों की मौजूदगी में उन पर मानसिक दबाव डाला गया और जबरन दस्तखत लिए गए। करमजीत सिंह ने दावा किया कि इसी दबाव के चलते 24 जून को हुए नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव में वे मौजूदा पदाधिकारियों के पक्ष में स्वेच्छा से मतदान नहीं कर पाए। पैराशूट नेताओं को तरजीह देने पर उठाए सवाल अध्यक्ष पद के अलावा करमजीत सिंह ने वरिष्ठ उपाध्यक्ष (Senior Vice President) और उपाध्यक्ष (Vice President) के चयन को भी पूरी तरह गलत ठहराया है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिन नेताओं को ये बड़े और महत्वपूर्ण पद सौंपे गए हैं, वे महज कुछ महीने पहले ही दूसरी पार्टियां छोड़कर 'आप' में शामिल हुए हैं। आप' पार्षद करमजीत सिंह सालों से पार्टी के लिए दिन-रात खून-पसीना बहाने वाले वफादार और पुराने कार्यकर्ताओं को किनारे लगा दिया गया है। नए और दलबदलू लोगों को मलाईदार पद देना संगठन के सिद्धांतों के खिलाफ है। इससे पुराने कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है। 'गुप्त मतदान होता तो पलट जाती बाजी' पार्षद ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उंगली उठाते हुए कहा कि यदि यह चुनाव पूरी तरह से गुप्त मतदान (Secret Ballot) या हाथ उठवाकर पारदर्शी तरीके से करवाया जाता, तो नतीजे कुछ और ही होते। उन्होंने दावा किया कि नगर परिषद के अधिकांश पार्षद मौजूदा पदाधिकारियों के कामकाज और उनके चयन के समर्थन में बिल्कुल नहीं हैं। भविष्य के जनाधार पर पड़ेगा असर करमजीत सिंह ने स्पष्ट किया कि वे यह लड़ाई अपनी निजी महत्वाकांक्षा के लिए नहीं, बल्कि पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं के सम्मान और संगठन के सिद्धांतों की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं और इसी वजह से उन्हें अदालत की शरण लेनी पड़ी। उन्होंने शीर्ष नेतृत्व को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि जमीनी कार्यकर्ताओं की इसी तरह अनदेखी होती रही, तो आने वाले समय में पार्टी के संगठन और उसके जनाधार को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। हाई कोर्ट पर टिकीं निगाहें पार्षद द्वारा अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकने और कोर्ट जाने के इस मामले में 'आप' के स्थानीय नेतृत्व या उच्चाधिकारियों की तरफ से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में सभी की निगाहें हाई कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई और उसके कानूनी व राजनीतिक नतीजों पर टिकी हैं।

